अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ
अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ
अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ
लड़की के पंख
बस में पति के साथ यात्रा कर रही है
कोई बीसेक साल की युवती।
हाथ भर चूड़ियाँ और
मेंहदी भरे हाथ।
माता, पिता ने उसकी राह आसान करने के लिए
जल्दी ही सिखा दिए उसे घर चलाने के लक्खण
और बाँध दिया अपनी नज़र से योग्य वर के साथ।
उसने न चलाई कभी साइकिल
न पढ़ी वो कस्बे के बड़े स्कूल में
लड़की, चुप बैठी है।
उसकी आँखें शून्य में खो रही हैं बार – बार।
अब घर में जल्दी ही भोर में वो जाग जाती है
और देखती है चिड़ियों को आकाश में उड़ते हुए।
यूँ देखते हुए
हर दिन उसका एक पंख टूटकर गिर जाता है।
उनकी खुशी
उनकी खुशी आजकल देखने लायक है
वे बड़ी श्रद्धा से इन दिनों मकरध्वज और जटायु की कहानियाँ सुना रहे हैं।
और कह रहे हैं
कि देखना,
वही सब पुरानी चीजें अब हमारी पाठ्यपुस्तकों में वापस आएँगी
जो हम भूल गये थे।
मैं सोच रही हूँ
क्या, मकरध्वज की तरह अब बच्चे पैदा होने लगेंगे ?
क्या, अब लोग हवाई जहाज की जगह गरुड़ पर यात्रा करने लगेंगे ?
क्या, कारों की जगह अब रथ ले लेंगे ?
क्या, सभी कूड़े में मुंह देती गायें कामधेनू बन राजाओं और ऋषियों के घरों में खूंटों से बंध जाएंगी ?
क्या, हमारे घरों और ऑफिसों में कंप्यूटर की जगह बहीखाते चलेंगे ?
यदि नहीं,
तो मुझे ताज्जुब है
कि उन्हें अपनी खुशी पर शक तक नहीं
बस, वे हवा में खुश हैं।
– अनुपमा तिवाड़ी