मनोरमा जैन ‘पाखी’ की कविताएँ
मनोरमा जैन 'पाखी' की कविताएँ
मनोरमा जैन 'पाखी'
सॉनेट (शेक्सपियरी शैली)
मात्रा भार -20
बाज़ार में न इश्क की खरीदारी,
बता गया यह पापी पेट हरबार।
मतलब हेतु यत्न में इच्छाधारी ,
किंतु यहाँ पर कुछ रहा नहीं उधार ।
कफ़न पर हुई साज़िश की तैयारी
नापाक इरादे फ़हरिस्त हर बार ।
महँगाई के इम्तिहान खुद्दारी ,
सावन बारिश सजे ख़्वाब बेशुमार ।
जूझना नियति पर ख़ामोशी भारी ,
स़च़ के साथ कर सहयोग सदा यार ।
वक़्त रुकता नहीं, सर्वत्र मक्कारी ,
अपनों के धोखे, कई हिस्सेदार ।
बर्बाद चमन ,है तलवार दुधारी ,
पीठ पीछे होती बातें तुम्हारी ,
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2-
सॉनेट..
14 मात्रा
बिन जल की जैसे मछली
जीवन का यह कैसा क्षण
साँसें यूँ तपती निकली
जैसे यही युद्ध का रण।
झूठी आशा फिर कैसी
मेघ टूट के क्यों बरसे
दर्श को आँख है तरसी
वन जंगल सब ही तरसे ।
हुई क्षीण हृदय की शक्ति
किसी को अब ना रहा भय
कैसी भगवान की भक्ति
भारत माता की ये जय ।
किस कस्तूरी को भटके
मृगतृष्णा सबसे बढ़ के।
चंद्रयान मिशन ..सॉनेट
पूरे विश्व में बज रहा ,
मिशन चंद्रयान का गान ।
वैज्ञानिकों से बढ़ रहा ,
भारत देश का भी मान ।
वही लैंडर ,वही विक्रम
वही रोवर नाम प्रज्ञान
भूल अतीत का पराक्रम
लेगा भारत वही स्थान।
इसरो ने तकनीक खोज ,
किया सफल स्वप्न अभियान ।
श्री हरिकोटा लिये ओज,
करता सतीश धवन मान ।
परचम भारत लहराये
स्वप्न चंद्र का दिखलाये ।
– मनोरमा जैन “पाखी”