
वह हमारे देश का
एक गरीब किसान था
मिट्टी से सम्मानित हुआ था
मिट्टी ने अपमानित किया था
मिट्टी से मिट्टी तक की
उसकी सारी यात्राएँ थीं
इस साल भारी सूखा पड़ा था
इतना कि उसकी आँखों के
कोरों का पानी भी
सूख गया था
जब मैंने उसे देखा
मुरझाई फसल-सा
वह घुटनों के बल
झुक कर
बहुत देर तक ढूँढ़ता रहा था
सूखी मिट्टी में
शायद कहीं बच गया
ख़ुशहाली का कोई साबुत दाना
अंत में जब उसने
अपना चेहरा उठाया था
उसकी आँखों में
ऐसा कुछ था
जिसे मेरा कैमरा भी
क़ैद नहीं कर सका था
फ़ोटो में
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