मिलना बहुत जरूरी है: श्याम सुन्दर श्रीवास्तव ‘कोमल’

मिलना बहुत जरूरी है

श्याम सुन्दर श्रीवास्तव 'कोमल'

बिना तुम्हारे जीवन जीना,यह कैसी मजबूरी है।
अब जीने के लिये प्राण प्रिय!,मिलना बहुत जरूरी है।।

रितुयें बदलीं,मौसम बदले,वे मधुमय दिन बीत गये।
बिना तुम्हारे यौवन घट भी,शनै-शनै सब रीत गये।
एक-एक पल बरसों जैसे,दिवस महीने युग जैसे
मन,नयनों में बसे हुये हो,तन से केवल दूरी है।
अब जीने के लिये प्राण प्रिय,मिलना बहुत जरूरी है।।

कब आया मधुमास और कब आकर चला गया।
इन दुखियारी आँखों को पावस, बरस-बरस कर रुला गया।
फिर काली घन घोर घटायें घुमड़-घुमड़ कर गरज रहीं
आजा मेरे मोर साँवरे,राधा बनी मयूरी है।
अब जीने के लिये प्राण- प्रिय, मिलना बहुत जरूरी है।

श्याम सुन्दर श्रीवास्तव ‘कोमल’

व्याख्याता- हिन्दी
अशोक उ०मा०विद्यालय,लहार
जिला- भिण्ड (म०प्र०)
मो०-9993282741

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *