सर्व व्याप्त चलायमान जूते…?
सर्व व्याप्त चलायमान जूते...?
- दिनेश गंगराड़े
जैसे अहंकार गुर्राता है,पैसा बोलता है,वैसे ही जूता भी बोलता है।जूतों की कीमत देखकर गरीबो का खून खौलता है,महंगे दामों के कारण आजकल जूते पैरों में कम सिर पर अधिक रखे जाते हैं?आजकल जनजीवन में जूतों का चलन, सट्टे की बलन,बढ़ते सुख,साधनों की जलन,सदविचारों की गलन का दौर जारी है।जूतों में जीवन है,सांस है,गति है,स्वाद है,जहर है,बड़बोलापन है,यारबाज है,सुखाध्य है,पुष्प है,राजनीति है,चांदी,सोना है।फिल्मों में भी जूतों का श्रेष्ठतम स्थान है।डायलॉग भी है-‘जॉनी, जूते चाहे कितने ही महंगे क्यों न हो,पैरों में पहने जाते है।सिर पर नही रखे जाते?महंगाई का जूता अब जन-जन को रुलाने लगा है।एक-दूजे पर जूते उछालना,आजकल लोगों का शगल है।जूतें, व्यक्ति की औकात दर्शातें,बेभाव,बेशकीमती जूतें अब पैरों में रहने को तैयार नहीं वरन सिर पर चढ़ने को आतुर है?वक्त का जूता अच्छे-अच्छों,तुर्रमखां, रसूखदारों को भी औकात दिखा देता है।जूते के महंगे दामों में मिलना और उन्हें पहनना व्यक्ति व जूतों की कैटेगरी दर्शाता है।जूतों की अकड़ आदमी का रौब,पेलवान की पकड़,रोग की जकड़,अलग दिख जाती है।उसकी खटखट चोरों को सतर्क रहने का संकेत देती है।ये पहनने के अलावा मिर्गी रोग में सूंघने में,भी काम आते हैं।जूते काटते भी है,एड़ी के ऊपर छाला सा कर देते है। बगैर मुंह व दांत के “बचका”भरना,जूतों का नया शगल है। वें चूँ-चूँ भी करते है?कमाल है ‘ कि बिना मुंह के जूता बोलता भी है।कई तो जूतों के यार होते है।माने ‘जूते दोस्ती-दुश्मनी भी करते हैं’? कई तो जूते खाये बिना मानते ही नहीं है। दुर्जनों को ये बेहद पसंद होते है।अहंकारी व्यक्ति गरीबों को जूतों की नोक पर रखते है।
‘जूते खाये भी जाते हैं’ और तन की भूख मिटाते हैं?मूर्खाधिराजों ,सम्मान में जूतों की माला भाती है।बेवकूफियों में जूते, बुद्धिमानी में व्यक्ति की अकल पूजी जाती है।सदियों से सरकारी दफ्तरों में चांदी का जूता चलता आया है,उससे ही सारे काम निपटते है।चांदी के जूते,स्वर्ण जूतों से हलके पड़ते है।बेचारे बेरोजगार, बस जूते ही चटखारते रहते है।पॉलिटिक्स,फ़िल्म उधोग ,शासकीय सेवाओं में “जूता चाटन”सदैव जारी रहता है।राजनीति में सदियों से जूतें चलने का रिवाज कायम है।अमीर लोग,गरीबों को जूते के बराबर भी नही समझते है।हिंदी के मुहावरों में भी जूते का अहम स्थान है।कई लोग बापड़ें दाल-रोटी पाने वास्ते जूते घिसते है,तब रोटी, दाल नसीब होती है किंतु कई परिवार में झगड़ो में जूते में भी दाल बंटती देखी गई हैं,ऐसे जूता उछालूं परिवारों की प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है।पुलिस,मुजरिमों की जूतों से खबर लेती है।कई अवसरों पर कई असहनशील बंदे जूते हाथ में उठा लेते है।
जूते फूल भी है और विजेता भी,इनका जलवा फुटबॉल मैच में देखने को मिलता है। ‘गोल्डन बूट’ मिलने पर खिलाड़ी की बनिस्बत जूता अधिक इठलाता है।याने जूता गोल्ड भी है।सोने का जूता तो सदियों से हर क्षेत्र में दमक रहा है और हर एब छिपाता है,हर परिस्थितियों में ये खूब सराहा ,चलाया जाता है। वेस्टर्न टेलीविज़न और मूवीज इंडस्ट्री में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता को ‘गोल्डन बूट अवार्ड’ दिया जाता है।सम्मान अभिनेता का हो रहा है कि जूते का?मिर्गी के दौरे में जूता रामबाण होता है।कुर्सी,नेताओँ को जूतों की नोक पर रखती है?जूता जीजा-साली के मध्य परिचय का माध्यम है।जूता व्यापार भी है,व्यापार में चलता भी है।जूता पैसेवाला,
रसूखदार भी है तभी तो जूतों का अपहरण व चोरी होती है।ये व्यवसायिक होने से शोकेस में सजाएं जाते है।रामराज में जूते, खड़ाऊँ राजगद्दी पर विराजमान हो चौदह वर्षों तक अयोध्या का राजकाज चलाते रहे।मतलब जूता, अनादि युग से राज भी चलाता है।राजनीति में भी दौड़ता है,चलता है,जूतमपैजार में भी सक्रिय भूमिका निभाता है?तो ‘ जूता महाराज ,अभिनेता भी है’।देश की एक थकेली पार्टी में बरसों से जूतम फांक जारी है?कुल मिलाकर लगता है कि ‘जूतों में जीवन’ ,विवेक,ज्ञान,
संवेदनशीलता,कूटनीति, राजनीति, व्याप्त है।वो प्रतिष्ठित चींज है।सम्मान का हकदार हैं और कभी-कभी उसकी बेइज्जती भी होती है?वो पैर में चमकना भी चाहिए तभी आदमी का व्यक्तित्व दमकता है।उसे देख लोग “अगले” की औकात मापते है?उसके रंग से सामने वाले का ढंग भांपते है।उसके फीते केटेगरी बताते है।बगैर बंद के शूज़, मोजड़ी से हिकारत पाते है?जूते कलरबाज भी होते हैं, वें पोलिश कराकर अपना रंग जमाते है?उसके तले मजबूत होंगे तो टिकाऊपन रहेगा?जमीन सख्त होनी चाहिए।इसलिए लोग नाल ठुकाते है।मतलब जूते खट्-खट् है,खटपट भी करते,कराते है?अंदर के सुकून वास्ते मनुष्य सुकतले डालता है।जीवन मे जूते अहम है,बाकी सब वहम है।राजनीति से लेकर व्यापार, नौकरी,में सर्वत्र जूते व्याप्त है।बगैर जूतमफांक के कहीं भी सुकून नही है?पब्लिक पैलेस, मंदिर,में जहा जूतों का हुजूम रहता है, कईयों की नीयत डोलने लगती है?बेशकीमती महंगे जूतें पहनकर जब आदमी मंदिर जाता है तो उसे भगवान से अधिक जूतों की चिंता रहती है? सामूहिक रूप से जब जूते चलते है तो अनर्थ घटता है।मूर्ख दिवस पर लोग जूतों की माला पहनकर सम्मानित होते है।सद्कर्मों पर फूलों की एवं दुष्कर्मों पर जूतों की माला दीनदुनिया पहनाती है।किसी विशेष कंपनी के बंददार जूते पहनने पर बंदे का घमंड सिर चढ़ कर बकता है।आजकल जूतों के भाव देखकर इन्हें पैरों में पहनने की अपेक्षा सिर पर धरना चाहिए?।पिता जब पुत्र को महंगे जूते पहनाता है तो गर्व से कहता है मैंने छोरे को जूते दिए?आजकल के शिक्षित बेटे ,बाप को जूते देते है?मतलब जूते पहनाते है।लोग जूते पहनते तो है अक्सर लेकिन कभी-कभी टिकाते भी है?गांवों में तो ये खासे चर्चित व सक्रिय रहने से कोई किसी को भी विवाद में धर देता है?जब अगले के ज्यादा खर्च,बजट के बाहर का होता है तो विरोधी मन ही मन प्रसन्न हो कर बड़बड़ाते-बुदबुदाते है अच्छे जूते पड़े उसको?मंदिरों में जब किसी के अति महंगे जूते चोरी होते है तो उपभोक्ता की शक्ल देखने काबिल होती है?पहनने वाले को स्वतः ही जूतें पड़ जाते है?सारा भक्ति भाव जाता है चूल्हे में?परिवारों में जूता पुराण चलता ही रहता है।लोग आपस मे कीचड़ तो उछालते ही रहते हैं साथ मे जूता भी फैकते है।मेरे एक चाटुकार मित्र नेता जी के जूते देखकर ही बता देते थे कि भय्या है कि नही?उन्हें उनके चेहरे से ज्यादा जूतों का ध्यान रहता है?गर शूज कास्टली है तो अगला अकड़ के चलेगा और यदि पाँव के कवच उर्फ जूते सस्ते दाम के है तो बंदा मुंह लटका के मरा-मरा टहलेगा माने जूते आदमी की चाल बदल देते है?जूता चोर जब कीमती जूतों पर हाथ साफ करता है तो यही जूतें उसे फूल से लगते है?जूतों का एक हास्यास्पद, मजेदार किस्सा मेरे साथ बीस साल पहले घटा था,जब मेरा एक मित्र तात्या ग्वालियर गया और मेरे लिए नौ नम्बर के एम्पोरियम के जूते लाया, जूते टिकाऊ, मजबूत, जोरदार निकले।मैंने भी पहले ही खरी-पक्की कर ली थी कि साल भर इन्हें पहन कर, वापरने के बाद पैसे दूंगा।अब जब मित्रमण्डली में चर्चा होती अगला कहता मैंने उनको जूते दिए। भुगतान करने के बाद ये हंसी-ठिठोली बंद हुई? बचपन मे जब स्पेशल ब्रांड शूज पहनते थे तो फूल के कुप्पा हो जाते थे। कई वर्षों तक तो घरवालों ने इसलिए जूते नही दिए न दिलाये की तुम्हारे पैर बढ़ने दो,कम उम्र में पहने तो पांव छोटा का छोटा रह जायेगा? तुम लंब तड़ग ,मोटे हो जाओगे किंतु तुम्हारे पांव भोत ही छोटे रह जाएंगे?
प्रेषक-दिनेश गंगराड़े,9425936653
समरपार्क, निपानिया, इंदौर452010, मप्र