निशा श्रीवास्तव की ग़ज़लें

निशा श्रीवास्तव की ग़ज़लें

-निशा श्रीवास्तव

आप गर रिश्ते बनाया कीजिए।
मन से भी सबको निभाया कीजिए।
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कौन सी कमजोर नस है आपकी,
हर किसी से मत बताया कीजिए।
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फूल से नाज़ुक अगर रिश्ते हैंतो,
उनको दुनिया से छुपाया कीजिए।
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रूठना फितरत हमारी है तो है,
आप बस यूँ ही मनाया कीजिए।
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लोग तो कहते रहेंगे कुछ न कुछ,
दिल को मत ऐसे जलाया कीजिए।
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आह कब लग जाय किसकी क्या पता,
मत किसी का दिल दुखाया कीजिये।

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(2)

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देख पाओगे कैसे,किधर जायेंगे।
वक़्त के जैसे हम भी गुजर जायेंगे।
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जब भी इस दुनिया को छोड़कर जायेंगे,
ख़ुशबुओं की तरह हम बिखर जायेंगे।
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बस वही उसका लहजा है, फ़ितरत वही,
बारहा उसने बोला सुधर जायेंगे।
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जब ज़रूरत न हो,कुछ न बोलो कभी,
बस, सिखा सबको ये ही हुनर जायेंगे।
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चाहिए कब तवज्जो किसी की कभी,
हर जगह सबसे हम बेखबर जायेंगे।
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मिल न पाये जो मंजिल कोई ग़म नहीं,
रास्ते तो मिलेंगे,जिधर जायेंगे।
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हैं मुसाफिर जहां में, हमें भी पता,
एक दिन तो मगर अपने घर जायेंगे।

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(3)

हमें हर तरफ रोशनी दिख रही है।
तुम्हें क्यों भला तीरगी दिख रही है।
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उन्हें ज़हर बोते ही देखा है हरदम,
नहीं उनकी आदत ये कोई नई है।
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अजब खौफ़ छाया हुआ है ज़हन पर,
अचानक बदल सी गई ज़िन्दगी है।
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वो जीता है किस कैफ़ियत में न जाने,
न आँखों में आंसू न लब पर हँसी है।
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सभी के लिए मायने हैं अलग से,
नहीं एक सी सबकी खातिर खुशी है।
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रहें लोग जब साथ,लगता है बेहतर,
नहीं वैसे जीवन में कोई कमी है।

-निशा श्रीवास्तव

ग़ज़ल, दोहा, मुक्तक, छंदमुक्त आदि विधाओं में लेखन

सम्प्रति—गृहिणी

निवास स्थान—गोरखपुर उत्तर प्रदेश

मोबाइल नंबर

9436838118

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