अशोक अंजुम के गीत
अशोक अंजुम के गीत
-अशोक अंजुम
१
गीत क्या है?
गीत क्या है-
रोशनी का घट
या कि डोरी पर थिरकता नट!
साँस का संगीत है ये
धड़कनों की ताल है
एक परिचित गंध वाला
रेशमी रूमाल है
गीत क्या है-
प्रेयसी की लट
या कि दुल्हन खोलती घूँघट !
सत्य का उद्घोष है
ये शिवम, ये सुन्दरम्
पीर जब पलती हृदय में
गीत तब लेता जनम
गीत क्या है-
रसपुरी के पट
या कि शीतल छाँव वाला वट!
२
कबिरा खड़ा उदास
होठों पर मधुमास सजा है
अन्तस में संत्रास
यहाँ-वहाँ हर ओर जगत में
मात्र विरोधाभास
जो हैं अपने
सभी बगल में
छुरी दबाये हैं
अक्सर
विश्वासों से हमने
धोखे खाये हैं
वह उतना ही दूर निकलता
जितना लगता पास!
सच्चाई के
माथे पर हैं
बूँद पसीने की
कौन जानता
कला यहाँ पर
मरने-जीने की?
मृग -मरीचिका बनकर उभरे
खुशियों का अहसास।
इच्छाएँ हैं ढेर
हमारी
चादर छोटी है
पड़े-पड़े हम
रहें कोसते
किस्मत खोटी है
दो पाटन के बीच पिसें सब
कबिरा खड़ा उदास!
यहाँ नैनसुख
आँखों पर हैं
पट्टी को बाँधे
जिनके ऊपर
भार सत्य का
झुके वही काँधे
बरसे कंबल, भीगे पानी
लगे नदी को प्यास!
३
खोल के गठरी
पोंछा नहीं पसीना मेरा
देखी नहीं थकन
खोल के गठरी बैठ गया है
सारा घर-आँगन
बिट्टू ने मुँह लटकाया
ना लाये मोटरकार
छुटकी को है नापसन्द उफ्
मोती वाला हार
पलट-पलट कर देख रही माँ
नर्म, रेशमी शाल
रंग ज़रा-सा हल्का है बस
दिल में यही मलाल
हाय, दुपट्टे में कट निकला
गुमसुम हुई बहन
खोल के गठरी—
पत्नी को साड़ी का पल्लू
छोटा लगता है
बापू को कुर्ते का कपड़ा
मोटा लगता है
ये छोटू के पेंट-शर्ट
कुछ बड़े-बड़े से हैं
बाकी तो सब ठीक-ठाक
अंगूर सड़े-से हैं
रस्ते की कोई न पूछता
वर्षा, धूप, तपन
खोल के गठरी—
-अशोक अंजुम
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