खाली हो कर आए हैं! – अशोक अंजुम का गीत
खाली हो कर आए हैं!
अशोक अंजुम का गीत
अभी अभी तो कुल्लू और
मनाली होकर आए हैं,
अम्मा थोड़ा सब्र करो
हम खाली हो कर आए हैं!
तुमको होश नहीं रहता,
सब – इधर-उधर धरती हो मां,
कितने चश्मे तोड़ चुकी हो
तुम भी हद करती हो मां,
तुम तो दुनिया देख चुकीं
कुछ हमको भी जी लेने दो,
कुछ घाटों का पानी अम्मा
हमको भी पी लेने दो,
हम दरख़्त से कट- पिट कर
इक डाली होकर आए हैं!
अम्मा थोड़ा सब्र करो
हम खाली हो कर आए हैं!
तुम्हें मोतियाबिंद, तुम्हारे-
घुटने भी कमज़ोर हुए,
ब्लड प्रेशर है, तुम्हें शुगर है
हम सुन-सुनकर बोर हुए,
अम्मा घर का खर्च चलाना
कठिन हुआ महंगाई में,
पूरा वेतन उड़ जाता है
राशन और पढ़ाई में,
हम अम्मा खु़द, ख़ुद की खातिर
गाली होकर आए हैं!
अम्मा थोड़ा सब्र करो,
हम खाली हो कर आए हैं!
अम्मा बोली – चश्मा छोड़ो
जीवन सुखद बनाओ तुम,
रहे खिलखिलाहट जीवन में
ख़ूब मनाली जाओ तुम,
सबको उतना ही मिलता
जो ऊपर वाला लिखता है ,
बिन चश्मे के बेटा तेरा
चेहरा धुँधला दिखता है ,
अपने नाज़ुक कन्धों पर तुम
कितने बोझ उठाए हो ,
पता नहीं था बेटा बिल्कुल
खाली होकर आये हो !
अशोक अंजुम
स्ट्रीट-2 , चन्द्र विहार कॉलोनी
( नगला डालचंद ) क्वार्सी बायपास , अलीगढ-202002
मोबाइल : 09258779744
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