जिसने दगा दिया वो भुलाया नहीं गया
खुलके किसी को दर्द बताया नहीं गया
चाहा था अपनी जान से ज़्यादा सदा जिसे
वह शख्स अपने दिल से हटाया नहीं गया
तुम जा के बस गए हो भला किस जहांन में
वापस जहां से लौट के आया नहीं गया
जैसा सजाया था कभी स्वागत में आपके
घर-द्वार वैसा फिर से सजाया नहीं गया
तन्हा ये ज़िन्दगी का सफ़र काट रहे हैं
तुमको भुलाना चाहा भुलाया नहीं गया
तुमको जो नापसंद था वो आज तक कभी
इक भी कदम कोई भी उठाया नहीं गया
तुम हो नहीं जहांन में एहसास है मुझे
लेकिन तुम्हारी याद का साया नहीं गया