पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें – पीयूष अवस्थी

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पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें

पीयूष अवस्थी

दिलों का दिल से अगर वास्ता नहीं होता
क़सम ख़ुदा की कोई हादसा नहीं होता

यही है प्यार की क़िस्मत,उसे पहुँचना है
उन्हीं हदों में जहाँ रास्ता नहीं होता

वो सूने घर में कलेण्डर सा फड़फड़ाता है 
कि दर्द जिसका कोई हमनवा नहीं होता

न जाओ शक़्ल पे,सूरत पे,शखि़्सयत देखो
दिखे है जिसमें वही आइना नहीं होता

न देख ग़ैर के जख़्मों को यूँ  हिक़ारत से
है कौन ऐसा कि जिसका बुरा नहीं होता

तमाम लोग हैं दुनिया में आप जैसे ही
कोई भी शख़्स मगर आपसा नहीं होता

’’’

2.

मेरे ग़म रहें सलामत, मैं उन्हें न भूल जाऊँ
मेरा इश्क़ है इबादत, मैं उन्हें न भूल जाऊँ

मेरी ज़िन्दगी का मक़सद, है उन्हीं पे आ ठहरता
रहे प्यास ताक़यामत ,मैं उन्हें न भूल जाऊँ

मेरे दर्द को जो समझे, है कहाँ सिवाय उनके
ये ख़ुदा ने बख़्शी रहमत, मैं उन्हें न भूल जाऊँ

मैं उड़ा हूँ बन परिन्दा ,इसी आसमां में लेकिन
है ज़मीं पे उनकी सूरत, मैं उन्हें न भूल जाऊँ

मेरी हसरतों का जज़्बा, किसी प्यास से जुड़ा है
रहे उनको मेरी चाहत, मैं उन्हें न भूल जाऊँ

मेरी ख़्वाहिशों में शामिल, है उन्हीं का अक्स तन्हा
मेरे ख़्वाब हैं विरासत, मैं उन्हें न भूल जाऊँ

– पीयूष अवस्थी

गीतकार एवं शाइर

मुख्य संपादक

शब्दकार पत्रिका, शब्दकार प्रकाशन

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