प्रदीप चौहान “दीप” की ग़ज़ल – प्रदीप चौहान “दीप

Pradeep Chauhan

प्रदीप चौहान “दीप” की ग़ज़ल

प्रदीप चौहान “दीप

प्रेम के  मैं  गीत  गाता  जा रहा हूं
नफ़रतें सारी  हटाता  जा रहा हूं।।

हो रहा हैरान है मुझपे  जमाना
हार में भी मुस्कराता जा रहा हूँ।

दिख रहीं रिश्तों में’मुझको दूरियां जो
उन सभी को मैं मिटाता जा रहा हूँ।। 

मैं तुम्हारे साथ हूँ सच जान लो ये
बस तुम्हीं को ही निभाता जा रहा हूँ।।

क्या तुम्हें मालूम है क्या हो गया है
मैं तुम्हारा दिल चुराता जा रहा हूँ।।

याद करना या न करना अब मुझे तुम
आप बीती मैं  सुनाता जा  रहा हूँ।।

‘दीप’ कहता है कभी  भी ना बुझेगी
प्यार की वो लौ जलाता जा रहा  हूँ।।

 

– प्रदीप चौहान ‘दीप’

बरौनी रिफाइनरी टाउनशिप

बेगूसराय (बिहार) 851117

Mob. 9416784866, 8398834091

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