किन्नर का नजरिया
किन्नर का नजरिया
- डा.वीणा विज 'उदित'
हमारी गली के आखरी घर में करतार सिंह के घर पोता होने पर हिंजड़े नाचने आए थे। इसके लिए सारी गली को आमंत्रित किया गया था। जितने लोग आएंगे ,उतने ही नवजात शिशु पर नोटों के वारने होंगे और वो पैसे हिंंजड़ों को मिलेंगे। घर वाले तो रिवाज के मुताबिक साड़ी ,चावल की बाल्टी, नगद धनराशि और सोने की अंगूठी भी देंगे। सो बहुत शान से जोरदार नाच गाना चल रहा था। इस बीच में एक दस साल का बच्चा उनके बीच में आकर कूल्हे मटकाने और नाचने लगा।
उसके हाव-भाव से वह भी इन्हीं की श्रेणी का लग रहा था। हिंजड़ों की उस्ताद जो कि ढोलकी पर बैठा था उसकी थाप वहीं रुक गई। उसने हाथ आगे बढ़ाकर उस बच्चे को पास बुलाना चाहा कि तभी उसकी मां उसे लेकर भीड़ में गुम हो गई। इनके उस्ताद का चैन उस बच्चे के साथ ही छिन गया था। उसने ढोलकी दूसरे को पकड़ाई और बोला नाच गाना चालू रखना। वह स्वयं भीड़ से बाहर निकल कर पूछताछ शुरू करने लगा तो एक बच्चे ने बताया कि वह फलानी कोठी में रहता है। उस्ताद सीधा उस कोठी में चला गया और उनसे कहा,” बाहर आइए हमारा बच्चा हमें दे दीजिए! हमारा हक बनता है ऐसे बच्चों को अपने साथ रखने का। आप इसे अपने घर में असूलन रख ही नहीं सकते हैं।”
कोठी वाली मिसेज अरोड़ा बच्चे को छाती से लिपटाए रोने लगी और बोली,”मेरे भाई मुझ पर रहम करो मेरा बच्चा ठीक-ठाक पल रहा है। स्कूल भी जाता है पांचवी कक्षा में पढ़ रहा है। किसी को तंग नहीं करता है । आप इसे मेरे घर में ही रहने दो । आपकी बड़ी मेहरबानी होगी। मैं आपके पैर धोकर पियूंगी। पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बनेगा। (अपना आंचल उसके आगे फैलाते हुए) किस्मत ने जो हमें मार दी है उस मार से केवल आप ही बचा सकते हो। मुझ पर मेहर कर दो।”
मिसेज अरोड़ा रोते हुए उसके चरणों में गिर गईं।
किन्नरों के उस्ताद का जिंदगी में पहली बार दिल पिघल गया। और उसने अपना फैसला सुना दिया। “बहन अगर आप इसे पढ़ा- लिखा कर अच्छा इंसान बनाएंगे तो अपने पास ही रख लें! मैं भी यही चाहता हूं कि हम किन्नर लोग भी समाज में सिर ऊंचा कर के जी सकें। यह जो हममें और आप में अंतर है यह मिट जाए।
काश! किसी ने पहले ऐसी जिद्द की होती तो आज हम भी समाज में कुछ स्थान बना पाते ना कि ऐसे नाचते…..
– डा.वीणा विज ‘उदित’
कलाकार , कवयित्री व साहित्यकार
फोन # 9682-639-631 जलंधर
225-767-7679…US
408-375-6353..US
Blog–
www.veenavij.com
You tube–
veenavij’Rachna’ ,&TV programmes.
लाहौर में जन्मी वीणा ने विभाजन के पश्चात मध्यप्रदेश की सोंधी मिट्टी की सुगंध में जीवन की ऊँच-नीच की शिक्षा पा कर पंजाब की धूप में चमक कर , पति के संग कश्मीर में रह कर शिकन और झुर्रियो को पनाह दी| एम.एड में जबलपुर विश्वविद्यालीय स्वर्ण पदक मिला | १९६३ में गणतंत्र दिवस परेड में मध्यप्रदेश को रिप्रज़ैंट कर बैस्ट एन.सी.सी अंडर आँफीसर बनीं | तूलिका से कैनवस र्ंगकर भी भावाभिव्यक्ति करती रहती हैं| नृत्य-नाट्य़ में बचपन से ही गहन अभिरुचि रही | १९८३ से दूर-दर्शन और आकाशवाणी जलंधर से जुड़ गईं |हिन्दी और पंजाबी के तकरीबन सौ नाटकों,धारावाहिकों व छैः फिल्मों मे सन २००० तक अभिनय किया |
शिक्षा-एम ए एम एड जबलपुर में, विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक विजेता के फल स्वरूप 1969 में एनसीईआरटी दिल्ली की ओर से स्कॉलरशिप के साथ शोध हेतु अर्थात ‘शिक्षा’ विषय पर पीएचडी का आमंत्रण।
1970 में स्वामी श्रद्धानंद (श्री मुंशीराम विज ) के परिवार की बहू बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।