अनुभव से खुलते है सफ़लता के द्वार
समय की आवाज़
अनुभव से खुलते है सफ़लता के द्वार
नृपेन्द्र अभिषेक नृप
जीवन में सफल होने के लिए मनुष्य अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करता है। सफलता की प्राप्ति के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है। ज्ञान प्राप्ति का एक प्रमुख मार्ग अनुभव होता है, जिसके द्वारा हम अपने जीवन की नैया पार लगाते हैं। वास्तव में अनुभव वह सीख है जो प्रत्येक व्यक्ति अपनी भूलों से प्राप्त करता है। हम सब अपने जीवन में कई कठिन परीक्षाओं से गुजरते रहते हैं। कई बार गलतियां होती हैं तो अक़्सर विफल रह जाते हैं। हम अपने जीवन में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जो हमें तत्काल तो कटु अनुभव देती हैं, परंतु वे भावी जीवन में तमाम संभावित स्मृतियों को मधुर बनाने का आधार बनती हैं। दरअसल, उनसे प्राप्त अनुभव के आधार पर अगली बार हम ऐसी गलतियों से बचते हैं। किसी ने सच ही कहा है कि गलती करना मूर्खता नहीं होती, बल्कि गलतियों को दोहराना बहुत बड़ी मूर्खता होती है। अनुभव ही हमें ऐसी गलतियों से बचाने में सहायक सिद्ध होता है। राजा ठाकुर ने कहा है- “दूसरों के अनुभववों के ख़ज़ाने में सेंधमारी करने वाला शख़्स बुद्धिमान है।”
अनुभव सामान्य हों या महत्वपूर्ण, मनुष्य के जीवन में सबका महत्व है। कोई भी काम स्वयं करके सीखने की प्रक्रिया में सफलता से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण असफलता होती है जो सीखने वाले को समझ की गहराइयों में ले जाती है। हमारी परम्परागत शिक्षा व्यवस्था असफलता को अच्छी नज़र से नहीं देखती और दंडनीय समझती है। परिमाणस्वरूप बच्चे गलतियां छुपाने की कोशिश करते हैं और ग़लत हो जाने के डर से सीखने से वंचित रह जाते हैं।
अनुभव हमारी जिंदगी से कमाया हुआ वह फल है, जो हमें हर समय काम आता है। अनुभव ऐसी कीमती वस्तु है जो, जितना अधिक पास होगा, उतना ही वो खास होगा। अनुभव से हासिल समझ, सीखने वाले में आत्मविश्वास पैदा करती है। यह आत्मविश्वास क़िताबी ज्ञान से नहीं मिलता। दुःख की बात है कि हमारी स्कूली शिक्षा अनुभव को पर्याप्त तवज्जो नहीं देती। परिणामस्वरूप क़िताबी सूचनाओं को रटकर अच्छे-से अच्छे अंकों से परीक्षा पास करना ही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य बन गया है। जीवन की असल चुनौतियों को हल करने में स्कूली शिक्षा कतई काम नहीं आती है।
इस संदर्भ में महात्मा गांधी ने कहा है- “भूल करके सीखा जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जीवन भर भूल ही की जाए।” सीखने मात्र के लिए हम अपने जीवन में हमेशा भूल करते नहीं रह सकते हैं। हमें कोशिश करनी चाहिए कि हर एक गलती से अनुभव लिया जाए और भविष्य में उस गलती को न दोहराएं। अतीत से सबक लेकर उसमें सुधार करें और जीवन में आगे बढ़ने की अपनी राह प्रशस्त करें। हमारे जीवन के कुछ बड़े अनुभव कठिन परिस्थितियों से प्राप्त होते हैं। इसलिए सच ही कहा गया है कि अनुभव से बड़ा और बेहतरीन न कोई मार्गदर्शक होता है, न कोई शिक्षक होता है और न ही कोई सचेतक होता हैं । अनुभव रहित जीवन बिन पतवार की हिचकोले खाती हुई नाव के समान है। हालांकि अनुभव तभी गुणकारी होता है जब हम कर्म की कसौटी पर उसके खरेपन को परखते हैं और बदली हुई परिस्थितियों के हिसाब से उसमे निरंतर सुधार लाते रहें।
– नृपेन्द्र अभिषेक नृप
छपरा, बिहार
लेखक परिचय:
मूल रूप से बिहार में जन्में आप वर्तमान में दिल्ली में रह कर सिविल सेवा की तैयारी के साथ-साथ शोधकार्य भी कर रहे हैं। पठन-पाठन में रुचि की वज़ह से सभी विधाओं में आपकी कलम चलती रही है। विगत 15 वर्षों में देश तथा विदेशों के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपके सैकड़ों आलेख, दर्जनों कविताएं, कहानियां एवं व्यंग्य प्रकाशित हुई हैं।