गर्लफ्रेंड बनोगी

कथा- कहानी

गर्लफ्रेंड बनोगी

पारुल अग्रवाल मित्तल

                              रितिका का जन्मदिन है आज। डाइनिंग टेबल पर ब्रेक फास्ट करते रजत से मां ने पूछा…

” आज क्या करना है शाम को रितिका का जन्मदिन है? बाहर लेकर चलोगे की घर में ही पार्टी रखे….

” मां मुझे तो आज बहुत काम है ,आप लोग देख लीजिए ।वैसे अब क्या ही बर्थडे मनाना।आठ साल हो गए शादी को।फिर भी जैसा आपको ठीक लगे।मैं लेट हो जाऊंगा।आप लोग एंजॉय करो….कहकर रजत बैग उठाकर ऑफिस चला गया।रितिका सब सुन रही थी।पिछले काफी समय से वो रजत के व्यवहार में रूखापन देख रही थी।और महसूस भी कर रही थी। जाने क्या ही था रजत के मन में ….

” मां घर में ही कुछ कर लेते है ना….रजत नहीं होंगे तो बाहर क्या ही जाना….रितिका ने बोझिल मुस्कान चेहरे पर लाते हुए कहा।

रजत को ऑफिस पहुंचने की बड़ी जल्दी थी।आज तृप्ति का प्रमोशन हुआ था। तृप्ति उसकी कलीग थी।रजत शादीशुदा था लेकिन तृप्ति से बहुत प्यार करता था। तृप्ति के साथ में उसे सुकून मिलता था।पिछले दस महीने से दोनो रिलेशन में थे…… तृप्ति ने कुछ और दोस्तो को भी अपने घर इनवाइट किया था पार्टी में।रजत को पता चला तो उसे बुरा लगा।

” तुमने … सौरभ को भी बुलाया है? रजत ने पूछा

” हां..क्यों? सवाल के जवाब में तृप्ति ने एक और सवाल पूछा।

” इसीलिए कि वो निहायत ही घटिया इंसान है। तृप्ति समझो उसकी नीयत अच्छी नहीं…और मुझे वो पसंद नही।तुम उससे मेल जोल खत्म करो…..रजत ने तृप्ति से कहा।

” मुझे तो सौरभ में कोई खोट नजर नहीं आता….हमेशा मेरी हेल्प करता है…..मां की बीमारी में भी कितने चक्कर काटे उसने…सॉरी रजत लेकिन इतना तो तुम भी नही कर पाए……. तृप्ति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा।

” तृप्ति ये उसकी चाल है ,समझो ….मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूं ….सौरभ को तुम्हारे आस पास बर्दाश्त नहीं कर सकता…. बस अब तुम उससे मिलना जुलना बंद करो…मुझे वो ज़रा पसंद नही….रजत ने तृप्ति को अपनी ओर खींचते हुए कहा।

” ये क्या जिद्द है रजत…. तृप्ति ने खिसयाते हुए पूछा।

” कितने सवाल करती हो….तृप्ति तुम बदल रही हो अब …पहले झट मेरी बात मान जाया करती थी।अब हर बात में बहस करती हो….क्या हो गया है तुम्हे..तृप्ति मैं तुम्हारी भलाई के लिए कह रहा हूं।मैं आज भी तुमसे बहुत प्यार करता हूं….रितिका की बर्थडे पार्टी छोड़कर तुम्हारे पास हूं….रजत ने कहा।

” रजत सॉरी…लेकिन तुम्हारा प्यार बेड़ी बनने लगा है मेरे लिए।इससे बात मत करो ,उससे मत करो ।यहां मत जाओ ,ये नही करो वो नही करो….रजत गर्ल फ्रेंड हूं तुम्हारी बीवी नही हूं….तो प्लीज गर्ल फ्रेंड की तरह ही ट्रीट करो…मेरा पति बनने की कोशिश न करो…. पति ऑलरेडी है मेरे पास।मुझे मेरी आजादी सबसे प्यारी है और तुम वही छीन रहे हो….अब तुम सोच लो।मेरे अनुसार आगे बढ़ सको तो ठीक वरना तुम अपने रास्ते और मैं अपने…. तृप्ति ने गुस्से से कहा।

” तृप्ति….तुम ऐसा कैसे कह सकती हो…हम एक दूसरे से प्यार करते है…मैने अपनी गृहस्थी दांव पर लगा रखी है और तुम सब खत्म कर रही हो….रजत ने रूआंसा होकर पूछा।

” रजत जाओ तुम,मुझे कोई लेक्चर नही सुनना….कहकर तृप्ति ने मुंह फेर लिया।

रजत बहुत कुछ कहना चाहता था लेकिन तृप्ति सुनना नही चाहती थी।रजत के कानो में तृप्ति के शब्द गूंज रहे थे” पत्नी नही हूं तुम्हारी” …..रजत के मन में आवेग था एक तूफान था।दिल बहुत भारी हो रहा था… वो सोच रहा था कब वो तृप्ति को पत्नी की तरह ट्रीट करने लगा।तभी रितिका का मैसेज आया” कितनी देर में आ रहे हो”

रजत ने एक फैसला किया और एक गिफ्ट खरीद कर घर पहुंचा ।रजत को समय से घर आया देख सभी खुश थे।अच्छे से रितिका का जन्मदिन मनाया गया।सभी के जाने के बाद रितिका कमरे में आई ।रजत उसी की प्रतीक्षा कर रहा था।

” आप सोए नही…रितिका ने कहा।

” नही…तुम्हारा इंतजार कर रहा था…सुनो…

” जी कहिए…..

” रितिका …..गर्ल फ्रेंड बनोगी मेरी….मैं तुम्हे अब एक प्रेमिका के रूप में देखना चाहता हूं…..अपने रिश्ते को खूबसूरत और मजबूत बनाना चाहता हूं…..बोलो गर्ल फ्रेंड बनोगी मेरी….रजत ने कहा।

” हां…..क्यों नही….कहकर रितिका रजत की बाहों में समा गई।उसके जन्मदिन का इससे अच्छा उपहार क्या होगा की उसका पति एक प्रेमी के रूप में लौट आया।

पारुल अग्रवाल मित्तल

Aligarh

agarwalmittalparul@gmail.com

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