परिंदे तेरी जात क्या?
कविता
परिंदे तेरी जात क्या?
ए के अर्चना
परिंदे तेरी जात क्या?
अक्सर आसमान में,
परिंदों को उड़ते देखती हूं तो,
यह खयाल आता हैं,
क्या मनुष्यों की तरह,
पशु पक्षी, जानवर भी,
जात – पात के,
भेद भाव में बंट जाता हैं।
कैसे स्वच्छंद विचरण करते हैं,
ये आकाश, नभ और थल में,
इनके पैरों में धार्मिक,
भेद भाव की जंजीरें नहीं हैं।
मनुष्य तो परिंदों से भी गया बीता हैं,
वो जात पात के नाम पर,
अपनी मनुष्य जाति को ही,
पूरी तरह से मिटाने बैठा हैं,
कुछ सीख, हे मनुष्य!
इन परिंदों से,
वरना एक दिन ऐसा आएगा,
तू जात पात के नाम पर,
एक दूसरे की जान ले लेगा और
यहीं परिंदा मज़े से,
अपने परिवार के साथ,
तुम सबको खाएगा।
परिंदों में भले ही मनुष्य की तरह,
सोचने समझने की शक्ति नहीं हैं,
पर उसमे अपने साथियों के साथ,
एक जुट होकर रहने की भक्ति सही हैं,
सीख ले मनुष्य!
इन परिंदों से कुछ,
वरना….
तेरी जात पात की लड़ाई में,
तू हार जाएगा,
मनुष्य जाति का नामों निशान,
इस धरती से मिट जाएगा,
और तेरे जाने के बाद,
ये परिंदा ही अपने,
परिवार और साथियों के साथ,
इस धरती पर रह जाएगा….
इस धरती पर रह जाएगा….
– ए के अर्चना
हिंदी विभागाध्यक्षा,
सैंट मैरिज सेंटेनरी डिग्री कॉलेज,
सिकंदराबाद, हैदराबाद।
सेल नंबर: 9966191991
मेल आईडी: archanashah434@gmail.com
आत्म परिचय: आपका नाम ए के अर्चना है। ये सैंट मैरिज सेंटेनरी डिग्री कॉलेज, सिकंदराबाद में हिंदी की सभाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।इन्होंने बी.एड (हिंदी), एम.ए (हिंदी) में शिक्षण ग्रहण किया हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इनका 17 साल का अनुभव रहा है। इनकी हिंदी और अंग्रेज़ी में कविताएं करने की रुचि रहीं है। इनकी कविताएं बहुत सारी प्रकाशन संस्थाओं के साथ जुड़ी है। अभी तक आपके कई प्रकाशन अलग – अलग संस्थाओं के साथ हो चुके है। अर्चना जी *तेलंगाना* की निवासी है और हिंदी की कुशल प्राध्यापिका है। आप विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक गतिविधियों में हमेशा सक्रियता से भाग लेती है तथा साहित्य के प्रति पूर्णत: समर्पित है।
इनका खुद के “इंद्रचाप” एवं “पढ़ ले! मैं तेरी किताब हूं” नामक कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इंडियन इंग्लिश पोएट्री एंथोलॉजी बाय यंग माइंड्स, आफरीन, दी गांधी एंड व्हर्लविंड, सृजन ऑस्ट्रेलिया, ब्रिथ इन लव : ए वैलेंटाइन कलेक्शन, स्पार्कल्स विथ इन मी: (वॉल्यूम 8,9,10,11,12,13,14,15), सांझ, एलेशियन मैगजीन, ओपन माईक कॉम्पिटिशन विन्नर, पर्सनल इंटरव्यू इन द अनहर्ड स्टोरीज बाय नोशन प्रेस पब्लिकेशंस, द मिनिएचर इंडियाना, विंटर डायरीज, मेटोनिया, इरेनिक 9.0, रहगुज़र, द स्प्लैश ऑफ कलर्स, एवेनोइर मैग्ज़ीन, ब्लू मून राइटिंग्स, अनुकर्ष वॉल्यूम नंबर 2, श्रावणधारा, कविताओं का आशियाना, ओपन डोर : किन्नर विमर्श पत्रिका : तालियां : दर्द और मुस्कान, फेलियर आर द पिल्लर ऑफ़ सक्सेस, कलरफुल, हैप्पीनेस : द आर्ट ऑफ लिविंग, फेयरी लैंड, विशेज़, प्रेम की पंखुड़ियां, ईश्वर ही प्रेम हैं, भावनाओं की गूंज, एक मुलाकात, दिवाली: द फेस्टिवल ऑफ लाइफ़, केज्ड बर्ड, ऑटाम आदि इनकी कविताएं प्रकाशित हुई हैं। कलकत्ता के समाचार पत्रों में भी आपकी कविताएं प्रकाशित हो चुकी है। इनकी अभी नई किताब प्रकाशित होने वाली है जिसका नाम है ” ख्वाबों के दरमियान” जिसकी प्रस्तुतिकरण “seven wonders”से हो रही है। जिसकी आप ही संस्थापक है।
इन्हें “इंडियन इंग्लिश पोएट्री एंथोलॉजी बाय यंग माइंड्स” में ” बेस्ट कवियित्री पुरस्कार” से सम्मानित किया गया और “द अनहर्ड स्टोरीज” के “ओपन माईक कॉम्पिटिशन” में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ तथा इनका इंटरव्यू एलेशियन फॉरेन मैग्जिन में छपा। इन्होंने अभी तक 50 से ज्यादा प्रकाशन गृहों में कार्य किया है। इनकी रचना सावन की फुवारों के लिए इन्हें काव्य शिरोमणि अवार्ड दिया गया। आपका प्रयास रहेगा कि ये आजीवन अपनी कविताओं को प्रकाशित करेंगी और सबके मन में अपना स्थान बनाएंगी।