अलका मिश्रा की ग़ज़लें – अलका मिश्रा

Alka Mishra

अलका मिश्रा की ग़ज़लें

अलका मिश्रा

1-
दर्द, नींदों को मुसलसल नहीं होने देता
एक भी ख़्वाब मुकम्मल नहीं होने देता

अपने एहसासे मुहब्बत से भी महरूम रखे
वो मेरी रूह को, संदल नहीं होने देता

उसने बख्शिश में मुझे ग़म तो दिए हैं लेकिन
क्या ये कम है , मुझे पागल नहीं होने देता

कोई दुश्मन न ज़माने में मेरा हो जाए
इसलिए वो मुझे अव्वल नहीं होने देता

ख़ुद न आ पाए न आए, प’ शिक़ायत है मेरी
अपनी यादों को भी ओझल नहीं होने देता

उम्र भर ज़ीस्त में उलझाए रखा है उसने
इस पहेली को कभी हल नहीं होने देता

इक मुहब्बत के इदारे से निकलने वाला
बस्तियों को कभी जंगल नहीं होने देता

2-
किसने चिंगारियाँ उछाली हैं
नफ़रतें क्यों दिलों में पाली हैं

कोई तो हादसा हुआ होगा
बस्तियाँ किसलिए ये ख़ाली हैं

अपनी इज़्ज़त बचा नहीं पाए
पगड़ियाँ किस लिए बचा ली हैं

सोचने से,कभी हुआ है कुछ ?
किसलिए उलझनें ये पाली हैं

मुश्किलें उसकी हो गईं आसां
जिसने कुछ नेकियाँ कमा ली हैं

आग बुझ तो गई मगर हमने
आग से उंगलियाँ जला ली हैं

– अलका मिश्रा
ग़ज़लगो, कवियित्री
पता – कानपुर, उ. प्र.
ई मेल – alkaarjit27@gmail.com

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