हॉस्पिटल का इन्स्पेक्सन

हॉस्पिटल का इन्स्पेक्सन – डॉ मुकेश ‘असीमित ‘ डॉ. महेश अपने चैंबर में उलझे हुए थे, इधर  बाहर मरीज़ों की लम्बी कतार और अंदर समय की टिक-टिक दोनों ही ओर से घिरे हुए । तीन बज चुके थे और मालती की दो बार की फोन की घंटी उन्हें लंच के लिए बार-बार याद दिला रही…

मोहभंग

मोहभंग पारस नाथ झा डॉक्टर साहब के घर के पास देर रात पुलिस की गाड़ी को देखकर लोग आश्चर्य में थे और कौतूक दृष्टि से देख रहे थे कि जब इस मकान में कोई नहीं रहता है और दो साल से खाली पड़ा है तो फिर क्यों पुलिस यहाॅं इतनी रात में खड़ी है और…

गण-पूर्ति का खेल

‘गण-पूर्ति का खेल’ – राम नगीना मौर्य, मौसम में हल्के जाड़े की दस्तक है। काफी-हाउस में गूंज रहे धीमें संगीत के बीच अ, ब और स, जो वर्षों पुराने मित्र हैं, बिलकुल कोने वाली सीट पर बैठे गरमा-गरम, तल्ख बहस में मशगूल हैं। किसी बात पर हारी-बाजी के कारण, नौबत हंसी-मजाक से बढ़कर वाक-युद्ध पर…

जुलूस

जुलूस – कला कौशल चौरसिया की हत्या का आज बारहवां दिन था। दोपहर में संकल्प-सभा का आयोजन किया गया था। संगठन के आदमी सुबह से ही इसकी तैयारी में लगे थे। बांध के ऊपर बनी सड़क के मोड़ पर काठ की चौकियों से मंच बनाया जा रहा था। सड़क की दोनों तरफ़ झंडों की लड़ियां…

प्रेम में समर्पण की अनिवार्यता

प्रेम में समर्पण की अनिवार्यता मेघा राठी प्रेम छोटा शब्द है लेकिन अर्थ में अनंत और व्यवहार में देखा जाय तो प्रेम का अर्थ कई कहे–अनकहे रूपों में ढला हुआ होता है। प्रेम मात्र एक भाव नहीं होता है ,प्रेम स्वयं में कई प्रकार के भावों को साथ लेकर चलता है। त्याग, समर्पण ये दो…

पुस्तकालयों में कम होती उपस्थिति

पुस्तकालयों में कम होती उपस्थिति – विजय गर्ग पुस्तकालयों में पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं जो हमें मानसिक शांति और संतुलन प्रदान कर सकती हैं। अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करने से न केवल हमारी समझ और सोच का विस्तार होता है बल्कि हमें आत्म-ज्ञान और मानसिक शांति भी मिलती है। किताबें हमें अपने विचारों…

शिक्षा से अधिक शादी पर खर्च

शिक्षा से अधिक शादी पर खर्च – विजय गर्ग हाल में एक खबर आई कि भारत के लोग शिक्षा की तुलना में विवाह पर लगभग दो गुना खर्च करते हैं। भारतीय विवाह उद्योग का मूल्य लगभग 10.7 लाख करोड़ रुपये है, जो इसे खाद्य और किराने के सामान के बाद दूसरा सबसे बड़ा उद्योग बनाता…

हम सब आज़ाद हैं?

हम सब आज़ाद हैं? पीयूष अवस्थी हमारे देश की आज़ादी का माह चल रहा है, देशवासी अपने देश की आज़ादी के 77 वर्ष पूरे करने की खुशियाँ मनाने की तैयारी में लगे हैं ! लेकिन आज़ादी के विषय में कुछ लोगों की अलग-अलग राय है, कोई कहता है देश को आज़ादी 1914 में मिली थी,…

लेखकों / पाठकों से

शब्दकार प्रकाशन लेखकों-पाठकों से निवेदन प्रिय दोस्तों ! मेरे अजीजों ! साहित्यिक-सामाजिक चेतना की प्रगतिशील ई-पत्रिका ‘‘शब्दकार’’ का शुभारम्भ हुआ है, तमाम साथियों ने अपनी रचनायें प्रेषित की हैं , जिनमें फिलहाल चयनित की गई रचनाओं को इस अंक में स्थान दिया गया है, कुछ रचनायें विचारार्थ हैं, जिन्हें सम्भवतः अगले अंक में प्रकाशित किया…

किताबें प्रकाशित कराने विषयक

SHABDKAR® PRAKASHAN “शब्दकार” पत्रिका®, शब्दकार प्रकाशन® Camp Office : Sector-8, Noida, U.P. E-mail-shabdkarprakashan@gmail.com मात्रा 15 दिनों में किताब प्रकाशित गीत, ग़ज़ल, दोहा, कविता, कहानी, उपन्यास साहित्यिक किताबों के विशेषज्ञ प्रकाशक हिन्दी, उर्दू, रोमन, अंग्रेजी आदि भाषाओं में प्रकाशन कम दाम उच्च गुणवत्ता समयान्तर्गत 120 पेज तक किताब, मात्रा रु. 11000/- किताब साइज . 8.5″ x…