पीयूष अवस्थी के पद

पीयूष अवस्थी के पद – पीयूष अवस्थी *** कृपया विशेष ध्यान दीजिये *** प्रिय दोस्तों!          लगभग 15 वर्षो से फेसबुक के माध्यम से आप सभी से जुडा रहा हूँ, गीत, ग़ज़ल, पद, कविता, कहानी लेख, हास्य -व्यंग्य आदि अनेक विधाओं की रचनाएँ देखने, पढ़ने, सुनने को मिलती रहीं! लेकिन कहीं भी ‘छंद -विन्यास’ की…

जयराम जय की ग़ज़लें

जयराम जय की ग़ज़लें – जयराम जय उजाले  के  दीपक  जगाने  चला हूं………………………….. अंधेरे   दिलों  के   मिटाने   चला हूंउजाले  के  दीपक  जगाने  चला हूं जो सूरज ने बांटे हैं कुछ को उजालेमैं समता  का सूरज  उगाने  चला हूं जिन्हें  हाशिए पर ही  रख्खा गया हैउन्हें   सामने   सबके  लाने  चला हूं बतासे  ही  मिथ्या  बाँटे  हैं …

अलका मिश्रा की ग़ज़लें

अलका मिश्रा की ग़ज़लें – अलका मिश्रा 1- ख़्वाबों को पलकों पर ढोना पड़ता हैजागी आँखों से भी सोना पड़ता है  उसको पाने की चाहत तो अच्छी हैलेकिन इसमें ख़ुद को खोना पड़ता है मुर्शिद से कुछ पाना हो तो फिर हमकोबिल्कुल बच्चे जैसा होना पड़ता है दुनियादारी के रस्ते पर चल तो देंलेकिन बीच…

डॉ. राकेश जोशी की ग़ज़लें

डॉ. राकेश जोशी की ग़ज़लें – डॉ. राकेश जोशी 1 कोई दस्तूर ज़माने का निराला क्यों होये अँधेरों का शहर है तो उजाला क्यों हो ये सफ़र है तो तुम्हें भी तो कहीं रहना थाइक मेरे पाँव के ही नाम पे छाला क्यों हो ये धुँआ आज जो निकले तो रुके फिर न कभीकारख़ानों के…

फटा नोट चलाने की कला

फटा नोट चलाने की कला – अखतर अली जितने भी प्रकार की प्रदर्शनकारी कलाए है उसमें एक कला की ओर आज तक किसी का ध्यान नहीं गया है जबकि इस कला का प्रदर्शन रोज़ाना सैकड़ो कलाकार बीच बाज़ार कर रहे है | यह है फटा नोट चलाने की कला | यह उतनी ही पुरानी कला…

विस्तृत भजिया कथा सार…?

विस्तृत भजिया कथा सार…? – दिनेश गंगराड़े जब और कुछ ना हो खाने के लिये तो मैगी या भजिये  खाना चाहिए।जब बनाने को कुछ और ना हो तो तो भजिये,मैगी बनाना चाहिए। जब भी कुछ खाने का ,खिलाने का मन हो ,कुछ खाने का मन ना हो। करने को कुछ ना हो ,करने के लिये…

प्लास्टर वाली टांग

प्लास्टर वाली टांग –डॉ मुकेश असीमित आप चाहते हैं कि आप हमेशा दुनिया की नजरों में बने रहें, सबकी निगाहें आप पर टिकी रहें। जिस गली से गुजरें, लोग आपको देखकर रुक जाएँ, हाल-चाल पूछें, आपको याद करें। बस, आप आ जाइए हमारे पास, लगवा लीजिए एक प्लास्टर… सच में, हर जगह आपकी पूछ होगी।…

अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ

अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ लड़की के पंख बस में पति के साथ यात्रा कर रही हैकोई बीसेक साल की युवती।हाथ भर चूड़ियाँ औरमेंहदी भरे हाथ।माता, पिता ने उसकी राह आसान करने के लिएजल्दी ही सिखा दिए उसे घर चलाने के लक्खणऔर बाँध दिया अपनी नज़र से योग्य वर के साथ।उसने न…

आकांक्षा यादव की कविताएँ

आकांक्षा यादव की कविताएँ – – आकांक्षा यादव की कविताएँ – नियति का प्रहार नारी बढ़ती जाती हैइक नदी की तरहअपनी समस्त भावनाओंऔर संवेदनाओं के प्रवाह के साथ।जीवन का अद्भुत संगीत औरआगोश में किलकारियों की गूँजकरती है वह नव-सृजननित् प्रवाहमान होकर।नदी की ही भांतिलोग रोकते हैं नारी का प्रवाहसिमेट देना चाहते हैंउसे घर की चहरदीवारी…

हरिवल्लभ शर्मा “हरि” की कविताएँ

हरिवल्लभ शर्मा “हरि” की कविताएँ – हरिवल्लभ शर्मा “हरि” हों नहीं कुंठित हमारी भावनाएं।कर्म में सब शक्तियों को हम लगाएं। जिस लिए यह जन्म मानव का मिला है,तोड़ तन्द्रा आत्मा को हम जगाएं। तोड़ सकता व्यूह अभिमन्यु यहाँ तो,हैं युवाओं में बहुत संभावनाएं। वज्र की छाती बना आघात झेलें,वार हित फ़ौलाद की करिए भुजाएं। तोड़…