मनोरमा जैन ‘पाखी’ की कविताएँ
मनोरमा जैन ‘पाखी’ की कविताएँ मनोरमा जैन ‘पाखी’ सॉनेट (शेक्सपियरी शैली) मात्रा भार -20 बाज़ार में न इश्क की खरीदारी,बता गया यह पापी पेट हरबार।मतलब हेतु यत्न में इच्छाधारी ,किंतु यहाँ पर कुछ रहा नहीं उधार । कफ़न पर हुई साज़िश की तैयारीनापाक इरादे फ़हरिस्त हर बार ।महँगाई के इम्तिहान खुद्दारी ,सावन बारिश सजे ख़्वाब…