आत्महत्या -एक लंबित प्रकरण – प्रेम प्रकाश चौबे

आत्महत्या -एक लंबित प्रकरण – प्रेम प्रकाश चौबे मित्रो, प्रत्येक मनुष्य के जीवन में अनेक कार्य होते हैं। जिन्हें वह समय रहते सम्पन्न कर लेना चाहता है, किन्तु कुछ काम ऐसे होते हे जो देखने में छोटे होते हुए भी निबटने में नहीं आते। ऐसा ही मेरा एक काम है जिसे में पिछले कई वर्षों…

लीकेज की प्रॉब्लम – पंकज शर्मा तरुण

लीकेज की प्रॉब्लम पंकज शर्मा तरुण आजकल देश में सब से बड़ी प्रॉब्लम( समस्या)लीकेज की है जो दिनों दिन विकराल होती जा रही है।युवा वर्ग को रोजगार के नाम पर व्यस्त रखने का इससे अच्छा कोई उपाय है भी नहीं!सरकार को मध्यप्रदेश की उपजाऊ भूमि से प्राप्त व्यापम घोटाले से प्राप्त नायब आइडिया फलीभूत होता…

किट्टी पार्टी का मज़ाकिया महासंग्राम – नृपेन्द्र अभिषेक नृप

किट्टी पार्टी का मज़ाकिया महासंग्राम – नृपेन्द्र अभिषेक नृप भोपाल के पंजाबी बाग में  दीवा गर्ल्स, जागृति के महिलाओं ने आज फिर से अपने चिर परिचित अंदाज़ में किट्टी पार्टी का आयोजन किया। यह कोई साधारण पार्टी नहीं थी, यह तो मानो महिलाओं का महासंग्राम था— जहां नोकझोंक, हंसी-मज़ाक, डांस और गीत-गाना बजाना का रंगारंग…

महात्मा और गांधी – डॉ मुकेश असीमित

महात्मा और गांधी डॉ. मुकेश असीमित रात सपने में गांधी जी ने दर्शन दिए । सच पूछो तो मैंने पहचाना नहीं ,न तो चश्मा..,न लाठी.., धोती भी फटी हुई,साथ में तीन बन्दर भी नहीं  थे, चरखा भी नहीं  ,बताओ भला कैसे पहचानता । बस कमर झुकी हुई थी ।मेरे पास आकर बैठ गए। मुह से…

ईमानदारी और सादगी के प्रतीक थे शास्त्री जी – अंकुर सिंह

ईमानदारी और सादगी के प्रतीक थे शास्त्री जी – अंकुर सिंह देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर को शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के घर उत्तर प्रदेश में मुगलसराय शहर के पास रामनगर में हुआ था। नेहरू जी के निधन के बाद शास्त्री जी देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने।…

गृहस्थी -राजेन्द्र परदेसी

गृहस्थी -राजेन्द्र परदेसी कितनी भी जल्दी की जाय, आफिस पहुँचने में देर हो ही जाती है। घर से यदि जल्दी निकला जाय तो बस की प्रतीक्षा में समय बीत जाता है। आफिस नज़दीक होता तो यह परेशानी न होती। पैदल ही चला जाता। लेकिन रोज-बरोज दस किलोमीटर की पैदल यात्रा की जहमत उठायी भी तो…

वो समय कुछ और था – नीरजा हेमेन्द्र

वो समय कुछ और था नीरजा हेमेन्द्र फोन की घंटी बजी।…..बात आज से लगभग पच्चीस वर्ष पूर्व की है। तब मोबाईल फोन नही होते थे। घर में बेसिक फोन होते थे जो किसी एक स्थान पर या अधिकतर ड्राइंगरूम में रखे रहते थे। ताकि पास-पड़ोस के लोग देख सकें। ये बेसिक फोन भी आम लोगों…

आवरण – कृष्ण कुमार यादव

आवरण – कृष्ण कुमार यादव स्नेहा…..स्नेहा….ओ स्नेहा अभी तैयार नहीं हुई क्या, देखो तो शाम के 6 बज चुके हैं और ये मैडम अभी बाथरूम में हैं, अमन उसे छेड़ने के इरादे से बाथरूम का दरवाजा खटखटाता है। अभी आई अमन! प्लीज तुम थोड़ी देर आराम करो, बस मै जल्दी से तैयार हो जाती हूँ।…

रिश्ते – अम्बिका कुशवाहा

रिश्ते – अम्बिका कुशवाहा गुप्ता जी बड़ी देर से बालकनी में टहल रहे थे। काफी चिंतित दिख रहे थे और बार बार मेन गेट की ओर देखे जा रहे थे।  तभी उनकी पत्नी साधना जी चाय लेकर आती है और कहती है ’क्यों इतना परेशान हो रहे हो? थोड़ी देर कुर्सी पर बैठ भी जाओ।…

संचार के जाल में में उलझा बचपन – विजय गर्ग

संचार के जाल में में उलझा बचपन – विजय गर्ग बच्चों की सोशल मीडिया पर व्यस्तता, आनलाइन गेमिंग और इंटरनेट की लत को लेकर दुनिया के कई देशों में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जाहिर की कि सोशल मीडिया…