राजेन्द्र तिवारी की ग़ज़ल – राजेन्द्र तिवारी

राजेन्द्र तिवारी की ग़ज़लें राजेन्द्र तिवारी 1- कहने को सरदार रहे हो तुम भी तो फिर भी दिल से हार रहे हो तुम भी तो प्यास बुरी शय है समझाते फिरते हो प्यासे बरख़ुर्दार रहे हो तुम भी तो बे-मतलब कोई बाज़ार नहीं जाता क्यों हरदम तैयार रहे हो तुम भी तो कोई कुछ समझाये…

प्रदीप चौहान “दीप” की ग़ज़ल – प्रदीप चौहान “दीप

प्रदीप चौहान “दीप” की ग़ज़ल प्रदीप चौहान “दीप प्रेम के  मैं  गीत  गाता  जा रहा हूंनफ़रतें सारी  हटाता  जा रहा हूं।। हो रहा हैरान है मुझपे  जमानाहार में भी मुस्कराता जा रहा हूँ। दिख रहीं रिश्तों में’मुझको दूरियां जोउन सभी को मैं मिटाता जा रहा हूँ।।  मैं तुम्हारे साथ हूँ सच जान लो येबस तुम्हीं…

पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें – पीयूष अवस्थी

पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें पीयूष अवस्थी दिलों का दिल से अगर वास्ता नहीं होताक़सम ख़ुदा की कोई हादसा नहीं होता यही है प्यार की क़िस्मत,उसे पहुँचना हैउन्हीं हदों में जहाँ रास्ता नहीं होता वो सूने घर में कलेण्डर सा फड़फड़ाता है कि दर्द जिसका कोई हमनवा नहीं होता न जाओ शक़्ल पे,सूरत पे,शखि़्सयत देखोदिखे है जिसमें…

केशव शरण की ग़ज़लें – केशव शरण

केशव शरण की ग़ज़लें केशव शरण 1- किसी शाम भी चार मिलते नहीं हैं अजब हाल है यार मिलते नहीं हैं  कहाँ से ख़बर धड़कनों की मिलेगी दिलों के अगर तार मिलते नहीं हैं किसी भी तरफ़ हम निगाहें फिराएँ हमारे तरफ़दार मिलते नहीं हैं चुभन मात पर भी चुभन जीत पर भी अलग कुछ…

वापस जहां से लौट के आया नहीं गया – जयराम जय

वापस जहां से लौट के आया नहीं गया जयराम जय जिसने  दगा दिया  वो  भुलाया  नहीं गया खुलके  किसी को  दर्द  बताया  नहीं गया  चाहा था  अपनी जान से ज़्यादा सदा जिसे वह शख्स अपने दिल से  हटाया नहीं गया  तुम जा के  बस गए हो भला किस जहांन में  वापस  जहां से  लौट के …

‘क्वार का है सुखद आना’ – डॉ मंजु लता श्रीवास्तव

‘क्वार का है सुखद आना’ डॉ मंजु लता श्रीवास्तव छिटक निकली धूप फिर भी मेह पल भर बरस जाना ब्याह स्यारों के हुए हैं क्वार का है सुखद आना आँजुरी भर-भरके  खुशबू ये हवा बिखरा रही है और गुलमेंहदी रँगों की छवि सुभग निखरा रही है पक्षियों का रागिनी के न‌ए सुर में गीत गाना…

खाली हो कर आए हैं! – अशोक अंजुम का गीत

खाली हो कर आए हैं! अशोक अंजुम का गीत अभी अभी तो कुल्लू और मनाली होकर आए हैं, अम्मा थोड़ा सब्र करो हम खाली हो कर आए हैं! तुमको होश नहीं रहता, सब – इधर-उधर धरती हो मां, कितने चश्मे तोड़ चुकी हो  तुम भी हद करती हो मां, तुम तो दुनिया देख चुकीं कुछ…

पर्यावरण की अनदेखी से बढ़ते भूस्खलन-डॉ रघुवीर चारण

पर्यावरण की अनदेखी से बढ़ते भूस्खलन डॉ रघुवीर चारण मानसून के आगमन से ही हिमालय की तलहटी से मैदानी इलाक़ो तक प्राकृतिक हरीतिमा छाई हुई है वर्षा ऋतु सर्व प्राणियों के जीवन में उत्साह व उल्लास का संचार करती है हमारे देश में दक्षिण-पश्चिमी मानसून की शुरूआत रिमझिम फुहारों से होकर आसमानीं आफ़त का रूप…

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल को अनलॉक करना – विजय गर्ग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल को अनलॉक करना विजय गर्ग सामाजिक कार्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अपेक्षाकृत एक उभरता हुआ अनुप्रयोग क्षेत्र है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में कंप्यूटर सिस्टम को उन कार्यों को करने में सक्षम बनाकर हमारे काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदलने की क्षमता है, जिनके लिए सामान्य रूप से मानव…

पृथ्वी मात समान – गोवर्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू “

पृथ्वी मात समान गोवर्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू एक शाम हम कुछ दोस्त पार्क में बैठ गपशप कर रहे थे जहाँ पार्क के बीच बच्चे खेल भी रहे थे।इसी बीच मेरा पोता अपने कुछ दोस्तों के साथ आकर मुझ से पूछा कि दादाजी  ‘अगर यह पृथ्वी न होती’ तो क्या होता। इतना सुनने के बाद…