राजेन्द्र तिवारी की ग़ज़ल – राजेन्द्र तिवारी
राजेन्द्र तिवारी की ग़ज़लें राजेन्द्र तिवारी 1- कहने को सरदार रहे हो तुम भी तो फिर भी दिल से हार रहे हो तुम भी तो प्यास बुरी शय है समझाते फिरते हो प्यासे बरख़ुर्दार रहे हो तुम भी तो बे-मतलब कोई बाज़ार नहीं जाता क्यों हरदम तैयार रहे हो तुम भी तो कोई कुछ समझाये…