अशोक अंजुम के गीत

अशोक अंजुम के गीत -अशोक अंजुम १ गीत क्या है? गीत क्या है-रोशनी का घट या कि डोरी पर थिरकता नट! साँस का संगीत है येधड़कनों की ताल हैएक परिचित गंध वालारेशमी रूमाल है गीत क्या है-प्रेयसी की लटया कि दुल्हन खोलती घूँघट ! सत्य का उद्घोष हैये शिवम, ये सुन्दरम्पीर जब पलती हृदय मेंगीत…

पीयूष अवस्थी के दोहे (पियूषा- दोहावली से)

पीयूष अवस्थी के दोहे (पियूषा- दोहावली से) – पीयूष अवस्थी राजनीति के मंच पर, झूठ बन गये साँचकठपुतली ही देखती, कठपुतली का नाच  जो हैं पूरे गाँव के, पहुँचे हुये हक़ीमउनके घर बीमार हैं,कब से राम -रहीम चिन्ता में मन यूँ पिरै, जैसे पिरती ऊखगिद्ध जहाँ पर बैठते, पेड़ जाय वो सूख जीवन लम्बा सोच…

शालिनी श्रीवास्तव की ग़ज़लें –

शालिनी श्रीवास्तव की ग़ज़लें – – शालिनी श्रीवास्तव मुक़द्दर  से  गिला-शिकवा  नहीं  है!!लकीरों  में  लिखा  मिटता  नहीं  है!! बुरा  आया  समय  जीवन  में  लेकिनबहुत  वो  देर  तक  ठहरा  नहीं  है!! सजाएँ अब चलो ख़्वाबों की महफ़िलहुई    मुद्दत   उन्हें    देखा   नहीं   है!! चले  आना  बिना  दस्तक  दिए  तुममिरे   दिल  पर  कोई  पहरा  नहीं   है!!…

प्रेम प्रकाश “प्रेम ” की ग़ज़ल

प्रेम प्रकाश “प्रेम ” की ग़ज़ल – प्रेम प्रकाश “प्रेम” खुल कर कह दे, मन में क्या है ?सच कह दे, उलझन में क्या है ? मौसम है तो फूल खिले हैं,वरना इस उपवन में क्या है ? व्यक्ति नहीं, गुण पूजे जाते,हाड़-मांस के तन में क्या है ? मंहगाई में गुण सुरसा का,छोटे से…

अशफाक़ ख़ान “जबल ” की ग़ज़ल

अशफाक़ ख़ान “जबल ” की ग़ज़ल – अशफाक़ ख़ान”जबल” गिर जाएगी  नफ़रत की ये दीवार किसी दिनबदलेगी  मुह़ब्बत   में ये  तकरार  किसी दिन लगती   है   मुझे   रेत   की  दीवार  के  जैसीढह जाएगी अब आपकी सरकार किसी दिन साँसों का भी अब बोझ उठाने की नहीं ताबगिर जाए न  ये  जिस्म की दीवार किसी दिन मुफलिस…

निशा श्रीवास्तव की ग़ज़लें

निशा श्रीवास्तव की ग़ज़लें -निशा श्रीवास्तव आप गर रिश्ते बनाया कीजिए।मन से भी सबको निभाया कीजिए।** कौन सी कमजोर नस है आपकी,हर किसी से मत बताया कीजिए।** फूल से नाज़ुक अगर रिश्ते हैंतो,उनको दुनिया से छुपाया कीजिए।** रूठना फितरत हमारी है तो है,आप बस यूँ ही मनाया कीजिए।** लोग तो कहते रहेंगे कुछ न कुछ,दिल…

पुष्पेंद्र ‘पुष्प’ की ग़ज़लें

पुष्पेंद्र ‘पुष्प’ की ग़ज़लें – पुष्पेन्द्र ‘पुष्प’ रक़ीबों  को  पुकारा  जा रहा हैहमें दिल से निकाला जा रहा है हमारी आँख पर पट्टी लगाकरनया मंज़र दिखाया जा रहा है बदन की ख्वाहिशें अब तक वही हैंमगर  चेहरा  बदलता  जा  रहा है जहाँ  तक  है  रसाई तीरगी कीवहाँ तक भी उजाला जा रहा है पुरानी दास्तानों …

भावना मेहरा की ग़ज़लें –

भावना मेहरा की ग़ज़लें – – भावना मेहरा इस जहाँ में आजतक किसका निशाँ बाक़ी रहा।चल दिए सब छोड़कर कोई कहाँ बाकी़ रहा।। चाह ने उसकी घुमाया है हमें यूँ दर- बदर,याद का लेकिन गुज़िश्ता कारवाँ बाक़ी रहा। जल रहा था घर हमारा दोस्तों की भीड़ में,सब गए मुँह मोड़ कर बस ये  धुआँ  बाक़ी…

फिल्म उद्योग में निर्देशक

फिल्म उद्योग में निर्देशक – विजय गर्ग फ़िल्में न केवल मनोरंजन और सूचना का बल्कि संचार का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसमें फीचर फिल्में, वृत्तचित्र, प्रचार फिल्में, टीवी विज्ञापन, संगीत वीडियो आदि शामिल हैं। फिल्म उद्योग पहले से कहीं अधिक बड़ा और विविध है। परिणामस्वरूप, फिल्म निर्माण में करियर रचनात्मक विचारकों के लिए एक…

आजादी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में हम कहां से कहां पहुंचे ?

आजादी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में हम कहां से कहां पहुंचे ? – विजय गर्ग अंग्रेजों ने भारत में शिक्षा को कुछ चुने हुए लोगों तक ही सीमित रखने की नीति अपना रखी थी। उन्हें सिर्फ ऐसी शिक्षा व्यवस्था से वास्ता था, जिससे उनका काम चल जाए, उसमें कोई दिक्कत ना आए। बाकी आम…