बेचारा दिल क्या करे

व्यंग्य

बेचारा दिल क्या करे

मेघा राठी

ये दिल भी न, बहुत नाशुक्री चीज है। जरा-जरा सी बात पर टूट जाता है तो कभी छोटी सी बात पर खुश हो जाता है…कभी बेवजह धड़कने लगता है तो कभी …कभी किसी पर आ जाता है।

यूं तो दिल को किसी को दे पाना बिना सर्जन के संभव ही नहीं पर फिर भी हम दिल किसी को दे बैठते हैं … हां एक बात जरूर है कि दोनों ही तरह से दिल देने के लिए इंसान को मरना तो पड़ता है।

दिल में भावनाएं नहीं होती, उसका काम तो खून को पंप करना है लेकिन फिर भी दिल उदास होने का और खुश होने का क्रेडिट भी ले लेता है।

और दिल को चीरने पर वैसे तो खून निकलता है लेकिन गानों में कहा जाता है कि दिल चीर के देख तेरा ही नाम होगा।

मैं तो सोचती हूं कि दिल कितना बेचारा है। प्राइवेट कंपनी के एम्प्लोई जैसा जिसे रखा तो किसी और काम के लिए जाता है लेकिन उसे अपनी नौकरी बचाए रखने के लिए एक्स्ट्रा काम भी करने पड़ जाते हैं।

दिल को जलना भी पड़ता है, सुलगना भी पड़ता है तब जाकर उसके मालिक का प्रेमी या प्रेमिका उस पर मेहरबान होकर उसके दिल को ख़ाक होने से बचाने आते हैं।

बेचारा क्या… क्या नहीं करता पर फिर भी सुनता है… ए काश कहीं ऐसा होता कि दो दिल होते सीने में। मतलब एक अकेले के काम की कद्र भी नहीं। कभी दिल खो जाता है तो कभी भंवरा बन जाता है। कभी दिल में किसी को बसा लिया… अरे भईया दिल है कमरा नहीं लेकिन नहीं…. शायर तो लिख गए … मेरे दिल में कमरा कर लो, न हम लेंगे सिंगिल पाई। तो बस कोई पसंद आया तो उसे दिल के कमरे में जगह दे दी और कमरा तो बड़ा होता है तो और लोग भी एडजेस्ट कर दिए जाते हैं उसमें।

कुछ लोग कहते हैं कि हम तो दिलवाले हैं… बेड़ा गर्क… बाकी लोग दुनिया में बिना दिल के पैदा होकर जी रहे हैं।

फलाने का दिल बड़ा है, उसका दिल छोटा है… उसका तो दिल ही नहीं….अरे तो वो जिंदा क्या वेंटीलेटर पर है!

दिल के किस्से भी बहुत हैं, दिल के फसाने भी बहुत और यह सुनकर भी बेचारा दिल केवल धक-धक करके ब्लड पंप करता रहता है और जब ज्यादा प्रेशर में आ जाता है तो अटैक दे कर हिला देता है… नामुरादों मुझे मेरा काम करने दो, ओवर प्रेशर मत दो और हो सके तो अपने प्रेमी या प्रेमिका के दिल की तरह अपने दिल का भी ख्याल रखो, थोड़ा खाने पीने पर ध्यान दो और खुशियों को महसूस करो …. साथ ही दूसरे को भी खुश रखो, तब दिल भी सुकून पाएगा और खुश होकर जाएगा…

धड़कने लगे दिल के तारों की दुनिया, संवर जाए हम बेकरारों की दुनिया, जो तुम मुस्कुराओ,

जो तुम मुस्कुरा दो….

अब ये दिल के बीमार इस बात को समझें तब न!

– मेघा राठी

भोपाल, मध्यप्रदेश

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