भागम भाग का दौर है: डॉ. अजय जोशी
भागम भाग का दौर है
डॉ. अजय जोशी

आज प्यारेमोहन जी बहुत घबराये हुए डरे से सहमे से हमारे यहां पहुंचे।हमने उनको बिठाया। पानी पिला कर सामान्य किया।जब वो सहज हुए तो हमने पूछा यार, इतने डरे हुए और परेशान क्यों हो भाई?
– डरने की बात तो है ही। हुआ यूं कि हमने दुलारेमोहन जी को पचास हज़ार रुपये उधार दे दिए।हमें देने ही पड़े क्योंकि उन्होंने अपनी जरूरत और मज़बूरी का इतना मार्मिक वर्णन किया कि हम खुद ही खुद से इमोशनली ब्लैकमेल हो गए।न चाहते हुए भी हमको अपनी गाढ़ी कमाई से की गई बचत का बड़ा हिस्सा उनको सौंपना पड़ा।प्यारेमोहन जी बोले।
– जब तुमने उधार दे दिए तो इसमें इतना डरने की क्या बात है लेनदेन तो चलता ही रहता है।बड़े बड़े उद्योगपति कारोबारी और यहां तक देश की सरकारें तक सब लोग कर्ज लेते हैं, उनको भी तो कोई न कोई कर्ज देता ही है । तुमने भी दुलारे मोहन जी को दे दिया।इसमें घबराना बीच में कहां से आ गया। हां यह जरूर है कि लेने देने वाले कभी कभी उनसठ सेकंड में एक करोड़ तक का लोन देने का दावा करते हैं इनसे कुछ लोग उनसठ करोड़ का लोन लेकर उनसठ सेकंड में भाग जाते हैं। तुम्हारे साथ तो वह भी नहीं हुआ होगा फिर तुम्हारा घबराना कैसा? यह मेरी समझ से बाहर है। वास्तव में तो तुम जब अपना पैसा वापस मांगो तो उसको घबराना चाहिए क्योंकि भाग जाने वालों को लोन देने की न तो तुम्हारी औकात है और वो ना ही तुम्हारे भरोसे बैठे हैं। उनके लिए तो बैंक वाले और उल फोन करने वाले उनके भायले ही काफी हैं।लोन लेने के बाद और भी बहुत से मित्र हैं जो उनको मिस्टर इंडिया बना सकते है। इस बड़े खेल में तुम जैसे टटपुँजिया लेन-देन वालों का कोई काम नहीं है।फिर तुम क्यों घबरा रहे हो?
प्यारेमोहन जी बोले – तुम्हारी सारी बातें सही है लेकिन मैं तो इधर की एक खबर से परेशान हूँ।
– किस खबर ने परेशान कर दिया भाई तुमको ? वो बोले पिछले दिनों अखबार में एक खबर छपी कि ‘उधार दिया हुआ पैसा मांगने पर एक व्यक्ति की हत्या’। खबर में लिखा था कि उधार दिया हुआ पैसा वापस मांगने पर उधार लेने वाले व्यक्ति ने देने वाले की हत्या कर डाली।मैं इस खबर से डर गया हूँ, अब दुलारेमोहन जी हर समय मुझे हाथ में चाकू या रिवॉल्वर लिए हुए मेरी तरफ आते हुए दिखते रहते हैं। उनका एक बार भारी भरकम आवाज में फोन भी आ चुका है वो बोले तुम कब और कहाँ मिलोगे,चुका ही देता हूँ तुम्हारा लोन।यह मुझे लोन चुकाने की सूचना कम और धमकी ज्यादा लग रही है।
हमें लगा मामला कुछ गम्भीर है।हमने पूछा अब तुम क्या चाहते हो। वो बोले सोचता हूँ कुछ समय के लिए अंडर ग्राउंड हो जाऊं या भाग जाऊं,तुम बताओ क्या करना है।हम सोचने लगे इधर तो उल्टी गंगा बह रही है, इसका क्या जवाब दें। वैसे हमें वह वाकया याद आ रहा है जब कुछ समय पहले एक बैंक वाले अपनी बैंक पर ताला लगा कर भाग गए थे।बैंक से लेकर भागने वाले तो पहले ही भागे बैठे हैं। उन्हें लाया जा रहा है,ये जुमला हम सालों से सुन ही रहे हैं।ये क्या भागम भाग चल रही है, लेने वाला भी भाग रहा है, देने वाला भी भाग रहा है।क्या जमाना आ गया है सब तरफ भागम भाग का दौर चल रहा है !
डॉक्टर अजय जोशी
संपादक – मरु नवकिरण
बिस्सों का चौक,बीकानेर 334001 राजस्थान
मो. 9414968900
[20/06, 1:18 pm] डॉक्टर अजय जोशी, लेखक: परिचय
प्रोफेसर डॉक्टर अजय जोशी
जन्मतिथि 20 नवंबर 1953
शिक्षा: एम. कॉम.,पी.एचडी और पत्रकारिता और जनसंचार स्नातकोत्तर उपाधि (MJMC)
व्यंग्यकार,लेखक-संपादक एवं रोजगार मार्गदर्शक
अनुभव: 37 वर्ष का वाणिज्य और प्रबंध में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षण कार्य
लगभग 30 वर्षों तक द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्रीज ऑफ इंडिया, नई दिल्ली से नॉमिनेटेड काउंसलर
35 वर्षों तक सीएस और सीए स्टूडेंट्स का अध्यापन और दोनों इंस्टीट्यूट की अलग अलग कमेटियों से जुड़ाव
5 वर्ष तक पत्रकारिता और जनसंचार विषय का अध्यापन
5 वर्ष तक एमबीए विद्यार्थियों का शिक्षण
3 विद्यार्थियों को पी एचडी उपाधि हेतु मार्गदर्शन
20 विद्यार्थियों को लघुशोध प्रबंध हेतु मार्गदर्शन
-हिंदी में एक साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका “मरु नवकिरण” के प्रधान संपादक
– बहुविषयी हिंदी और अंग्रेजी बहुभाषी शोध जर्नल मरु व्यवसाय चक्र का विगत 32 वर्षों से संपादन एवं प्रकाशन। यह पत्रिका भारत सरकार के समाचार पत्रों के रजिस्ट्रार से पंजीकृत है।इसको आई एसएसएन नम्बर भी प्राप्त है।
– हिंदी में व्यंग्य, लघुकथा,निबंध आदि समय समय पर राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।चार व्यंग्य संग्रह- 1 मैं आम आदमी हूं, 2 डॉ अजय जोशी:चयनित व्यंग्य संपादन हिमाचल प्रदेश की चर्चित व्यंग्य समीक्षक: चंद्रकांता। यह संग्रह राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चित और लोकप्रिय रहा। 3 पत्नीस्यमूडम 4 मत सुन जनता यह पैगाम प्रकाशित। सात राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझा व्यंग्य संग्रहों में व्यंग्य रचनाएं प्रकाशित। व्यंग्य यात्रा और अट्टहास जैसी व्यंग्य पत्रिकाओं में व्यंग्य प्रकाशित। गत पांच वर्षों से दैनिक युगपक्ष में “हास्य व्यंग्य तरंग” स्तंभ में साप्ताहिक व्यंग्य प्रकाशित।
-वाणिज्य और अर्थशास्त्र विषय पर पांच हिंदी में और एक अंग्रेजी में पुस्तकें प्रकाशित जो विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित है। अर्थशास्त्र,बचत एवं निवेश, शिक्षा,रोजगार मागदर्शन, व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर जनसत्ता,दैनिक हिंदुस्तान,नवभारत टाइम्स,साप्ताहिक हिंदुस्तान,दैनिक भास्कर,राजस्थान पत्रिका,दैनिक युगपक्ष,सरिता, मुक्ता गृहशोभा,सुमन सौरभ,सरस सलिल,समाज कल्याण, नेफेड मार्केटिंग रिव्यू,कारपेट वर्ड आदि जैसी पत्र पत्रिकाओं में हजारों आलेख और फीचर प्रकाशित। पर्यटन,कंपनी अधिनियम,बीमा,क्रियात्मक प्रबंध और ऊन उद्योग पर एक अंग्रेजी और चार हिंदी पुस्तकों का प्रकाशन।
– रोजगार – स्वरोजगार मार्गदर्शन संस्थान के निदेशक के रूप में विद्यार्थियों को रोजगार मार्गदर्शन
सम्प्रति: 30 वर्ष तक स्थानीय श्री जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय और 7 वर्षों तक राजकीय महाविद्यालय चित्तौड़गढ़, नागौर और अंत में राजकीय महाविद्यालय, सुजानगढ़ से सेवानिवृत।
संपर्क,: बिस्सों का चौक, बीकानेर 334001 राजथान
मो 9414969000,8963050900
Mail dr.ajaykjoshi@gmail.com