पृथ्वी मात समान – गोवर्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू “
पृथ्वी मात समान गोवर्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू एक शाम हम कुछ दोस्त पार्क में बैठ गपशप कर रहे थे जहाँ पार्क के बीच बच्चे खेल भी रहे थे।इसी बीच मेरा पोता अपने कुछ दोस्तों के साथ आकर मुझ से पूछा कि दादाजी ‘अगर यह पृथ्वी न होती’ तो क्या होता। इतना सुनने के बाद…