शेष होकर भी अशेष
शेष होकर भी अशेष – डा.वीणा विज ‘उदित’ अतीत के झरोखों में झांकती, मन ही मन स्वयं से बतियाती नींद की आगोश में जा ही रही थी कि फोन की घंटी टन टना उठी… “हेलो” “हेलो –हेलो मां! आज फिर से मैं सपने में अपने पुराने वाले घर में रात भर खेलता रहा। वही पुरानी…