शेष होकर भी अशेष

शेष होकर भी अशेष – डा.वीणा विज ‘उदित’ अतीत के झरोखों में झांकती, मन ही मन स्वयं से बतियाती नींद की आगोश में जा ही रही थी कि फोन की घंटी टन टना उठी… “हेलो” “हेलो –हेलो मां! आज फिर से मैं सपने में अपने पुराने वाले घर में रात भर खेलता रहा। वही पुरानी…

बड़ी बी….!

बड़ी बी….! – सपना चन्द्रा अरे ओ कमाल! मुँआ कहाँ मर गया। देखता भी नहीं कि मेरी पनडिब्बी की सारी कसैली खत्म हो गयी। “बड़बड़ाते हुए दरवाजे तक उसे देखने आई। कहीं किसी के साथ गप्पें तो नहीं मार रहा। गुस्से से कमाल को आवाज लगाती रहीं पर वह घर में होता तो सुनता। किसी…

पागल

पागल – उपमा शर्मा शाम का ऑंचल झिलमिलाने लगा था। अपनी प्रचंड धूप समेट कर आदित्य नारायण अब बादलों की गोद में चल दिये थे। सुरमई आकाश दिन के बिखरे उजाले को अपने आँचल में,समेट मंद- मंद मुस्कुरा रहा था। मेरी आँखें सांझ की उस खूबसूरती को अपनी पलकों में समेट ही रही थी कि…

बाहर कुछ जल रहा है- सुशांत सुप्रिय

बाहर कुछ जल रहा है सुशांत सुप्रिय ज्वालामुखी के गह्वर में स्थित संत एन्ना झील एक मृत झील है । यह झील 950 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और लगभग हैरान कर देने वाली गोलाई में मौजूद है । यह झील बरसात के पानी से भरी हुई है । इसमें जीवित रहने वाली एकमात्र…

गृहस्थी -राजेन्द्र परदेसी

गृहस्थी -राजेन्द्र परदेसी कितनी भी जल्दी की जाय, आफिस पहुँचने में देर हो ही जाती है। घर से यदि जल्दी निकला जाय तो बस की प्रतीक्षा में समय बीत जाता है। आफिस नज़दीक होता तो यह परेशानी न होती। पैदल ही चला जाता। लेकिन रोज-बरोज दस किलोमीटर की पैदल यात्रा की जहमत उठायी भी तो…

वो समय कुछ और था – नीरजा हेमेन्द्र

वो समय कुछ और था नीरजा हेमेन्द्र फोन की घंटी बजी।…..बात आज से लगभग पच्चीस वर्ष पूर्व की है। तब मोबाईल फोन नही होते थे। घर में बेसिक फोन होते थे जो किसी एक स्थान पर या अधिकतर ड्राइंगरूम में रखे रहते थे। ताकि पास-पड़ोस के लोग देख सकें। ये बेसिक फोन भी आम लोगों…

आवरण – कृष्ण कुमार यादव

आवरण – कृष्ण कुमार यादव स्नेहा…..स्नेहा….ओ स्नेहा अभी तैयार नहीं हुई क्या, देखो तो शाम के 6 बज चुके हैं और ये मैडम अभी बाथरूम में हैं, अमन उसे छेड़ने के इरादे से बाथरूम का दरवाजा खटखटाता है। अभी आई अमन! प्लीज तुम थोड़ी देर आराम करो, बस मै जल्दी से तैयार हो जाती हूँ।…

रिश्ते – अम्बिका कुशवाहा

रिश्ते – अम्बिका कुशवाहा गुप्ता जी बड़ी देर से बालकनी में टहल रहे थे। काफी चिंतित दिख रहे थे और बार बार मेन गेट की ओर देखे जा रहे थे।  तभी उनकी पत्नी साधना जी चाय लेकर आती है और कहती है ’क्यों इतना परेशान हो रहे हो? थोड़ी देर कुर्सी पर बैठ भी जाओ।…

जोंक हुई मछली

जोंक हुई मछली – पीयूष अवस्थी ‘‘आई-लव-यू’’ कहते हुए सामने वाले ने अचानक उसके हाथ पर हाथ रख दिया। वह इस हमले के लिए तैयार नहीं थी। वह बुरी तरह घबरा गई। उसने ज़ल्दी से अपना हाथ हटा लिया। कमरे में कोई नहीं होगा, उसे यकीन था, फिर भी एहतियातन उसकी नज़र इधर-उधर घूम गई।…

हॉस्पिटल का इन्स्पेक्सन

हॉस्पिटल का इन्स्पेक्सन – डॉ मुकेश ‘असीमित ‘ डॉ. महेश अपने चैंबर में उलझे हुए थे, इधर  बाहर मरीज़ों की लम्बी कतार और अंदर समय की टिक-टिक दोनों ही ओर से घिरे हुए । तीन बज चुके थे और मालती की दो बार की फोन की घंटी उन्हें लंच के लिए बार-बार याद दिला रही…