मोहभंग

मोहभंग पारस नाथ झा डॉक्टर साहब के घर के पास देर रात पुलिस की गाड़ी को देखकर लोग आश्चर्य में थे और कौतूक दृष्टि से देख रहे थे कि जब इस मकान में कोई नहीं रहता है और दो साल से खाली पड़ा है तो फिर क्यों पुलिस यहाॅं इतनी रात में खड़ी है और…

गण-पूर्ति का खेल

‘गण-पूर्ति का खेल’ – राम नगीना मौर्य, मौसम में हल्के जाड़े की दस्तक है। काफी-हाउस में गूंज रहे धीमें संगीत के बीच अ, ब और स, जो वर्षों पुराने मित्र हैं, बिलकुल कोने वाली सीट पर बैठे गरमा-गरम, तल्ख बहस में मशगूल हैं। किसी बात पर हारी-बाजी के कारण, नौबत हंसी-मजाक से बढ़कर वाक-युद्ध पर…

जुलूस

जुलूस – कला कौशल चौरसिया की हत्या का आज बारहवां दिन था। दोपहर में संकल्प-सभा का आयोजन किया गया था। संगठन के आदमी सुबह से ही इसकी तैयारी में लगे थे। बांध के ऊपर बनी सड़क के मोड़ पर काठ की चौकियों से मंच बनाया जा रहा था। सड़क की दोनों तरफ़ झंडों की लड़ियां…

क्या नाम था उसका ?

क्या नाम था उसका ? सुशांत सुप्रिय अब पानी सिर से ऊपर गुज़र चुका था । लिहाज़ा प्रोफ़ेसर सरोज कुमार के नेतृत्व में कॉलेज के शिक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए । धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया । प्रोफ़ेसर सरोज कुमार देश के एक ग़रीब और पिछड़े प्रांत के क़स्बे किशन नगर के सरकारी कॉलेज में…

विकल्प

विकल्प प्रेमलता यदु खूबसूरती व रूप-रंग के आगे सादगी को एक बार फिर अपने घुटने टेकने पड़े. आज एक बार फिर काजल का दिल टूट कर बिखर गया. यह बात अलग है कि उसके दिल टूटने की आवाज उन लोगों तक पहुंची ही नही जिन लोगों ने बड़ी ही निष्ठुरता, असंवेदनशीलता व कागज के चंद…

तेरा मेरा साथ

तेरा मेरा साथ रेखा भारती मिश्रा, पटना कमरे के वेंटिलेटर पर एक गौरैया उड़कर आती है और चोंच में लिए तिनका को वहां रखकर धीरे-धीरे एकत्रित करती जाती है. कभी-कभी उसके साथ एक दूसरी गौरैया भी आ जाती उसकी मदद के लिए. उसकी चोंच में भी फूस के तिनके दबे होते. कुछ दिनों के बाद…

“तुम मेरे हमसफर बनोगे”

“तुम मेरे हमसफर बनोगे” पूजा गुप्ता शाम का धुंधलका हो चुका था। ट्रेन धीमी गति से चल रही थी। शायद कोई स्टेशन आने वाला था।अक्षत ट्रेन की बोगी में खिड़की के पास बैठे हुए एकटक गहन विचारों में खोया हुआ था। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी अक्षत की तन्द्रा टूटी। वो चाय वाले को…

दर्द न जाने कोय: आदित्य अभिनव

दर्द न जानै कोय आदित्य अभिनव “पिया मोरा गइलें रामा पूरबी बनिजिया से दे के गइलें ना।एगो सुगना खेलवना रामा से दे के गइलें ना … ‘’सेब कपड़े से चमका-चमका सजा रहा राम प्रवेश अपने आप में ही डूब उतरा रहा था।“सेब क्या भाव ‘’ विमला ने अपने माथे पर आँचल रखते हुए पूछा।राम प्रवेश…

उसके लौट आने की आस

कथा- कहानी उसके लौट आने की आस डॉ प्रदीप उपाध्याय                           मैं जब ट्रेन से लौट रहा था तब रह-रहकर वही सब बातें जेहन में आ रही थी। मैंने सोच भी तो लिया था कि अब तत्काल वापस लौटने का कोई मतलब नहीं।…

“किशोरावस्था का प्रेम”

कथा- कहानी “किशोरावस्था का प्रेम” सतीश “बब्बा”                    हल्की – हल्की रेखा, नाक के नीचे भूरी लाइन से मूछों का आकार और चिकने – चिकने गालों पर भूरे – भूरे रोंएं मुझको आकर्षक बनाती थीं। मैं अब समझ पाया जो मेरी भाभियां कहतीं थीं कि, “पा जाऊं…