गूलर के फूल
कथा- कहानी गूलर के फूल नंदन पंडित विमल ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था। “हेलो!” उधर से पत्नी की बिलखती हुई आवाज आई। वह एक जूते का फीता बाँध चुका था। दूसरे जूते का फीता अज्ञात भय से उसके हाथ से छूट गया। काँपते हुए उसने कहा, “हाँ, कहो नीलम? क्या बात है?” “म्…