अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ

अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ अनुपमा तिवाड़ी की कविताएँ लड़की के पंख बस में पति के साथ यात्रा कर रही हैकोई बीसेक साल की युवती।हाथ भर चूड़ियाँ औरमेंहदी भरे हाथ।माता, पिता ने उसकी राह आसान करने के लिएजल्दी ही सिखा दिए उसे घर चलाने के लक्खणऔर बाँध दिया अपनी नज़र से योग्य वर के साथ।उसने न…

आकांक्षा यादव की कविताएँ

आकांक्षा यादव की कविताएँ – – आकांक्षा यादव की कविताएँ – नियति का प्रहार नारी बढ़ती जाती हैइक नदी की तरहअपनी समस्त भावनाओंऔर संवेदनाओं के प्रवाह के साथ।जीवन का अद्भुत संगीत औरआगोश में किलकारियों की गूँजकरती है वह नव-सृजननित् प्रवाहमान होकर।नदी की ही भांतिलोग रोकते हैं नारी का प्रवाहसिमेट देना चाहते हैंउसे घर की चहरदीवारी…

हरिवल्लभ शर्मा “हरि” की कविताएँ

हरिवल्लभ शर्मा “हरि” की कविताएँ – हरिवल्लभ शर्मा “हरि” हों नहीं कुंठित हमारी भावनाएं।कर्म में सब शक्तियों को हम लगाएं। जिस लिए यह जन्म मानव का मिला है,तोड़ तन्द्रा आत्मा को हम जगाएं। तोड़ सकता व्यूह अभिमन्यु यहाँ तो,हैं युवाओं में बहुत संभावनाएं। वज्र की छाती बना आघात झेलें,वार हित फ़ौलाद की करिए भुजाएं। तोड़…

मनोरमा जैन ‘पाखी’ की कविताएँ

मनोरमा जैन ‘पाखी’ की कविताएँ मनोरमा जैन ‘पाखी’ सॉनेट (शेक्सपियरी शैली) मात्रा भार -20 बाज़ार में न इश्क की खरीदारी,बता गया यह पापी पेट हरबार।मतलब हेतु यत्न में  इच्छाधारी ,किंतु यहाँ पर कुछ रहा नहीं उधार । कफ़न पर हुई साज़िश की तैयारीनापाक इरादे  फ़हरिस्त हर बार ।महँगाई  के इम्तिहान  खुद्दारी ,सावन  बारिश सजे ख़्वाब…

दिल लौटना चाहता है वतन – मीरा सिन्हा

दिल लौटना चाहता है वतन – मीरा सिन्हा दिल लौटना चाहता है वतन—एक कसक–कभी बड़ी तमन्ना थीवतन से बाहर जाने कीबहुत सुख सुविधा जुटानेकीविदेश ने बड़ेआदर सेर अपने गले लगायासुख सुविधा के सारे इंद्रजाल दिखायादिन के हर पल बड़े भले लगेयहां कि सुख सुविधा को रोज धन्यवाद देने लगासारी सुविधाएं मिल गईअब मैं मेरा परिवार…

दीवाली पर्व – विजय अरुण

दीवाली पर्व विजय ‘अरुण’ आज अमावस है पर  कितनी फैली है उजियाली।हर दीपक ने लौ अपनी अम्बर को आज उछाली।नन्हे नन्हे  दीप  हैं पर  कितनी  है  बात  निराली।इन  दीपों ने आज बदल दी रात  भयानक काली।फिर से आज धरा पर है एक नूर की बेला आली।जगमग जगमग दीप लिए फिर आई है दीवाली।। दीपक हैं …

शशिकला की कविताएँ

शशिकला की कविताएँ शशिकला त्रिपाठी 1. खुशी मिलती है पल दो पल वह थी सुखी औरों की निगाह मेंखूबसूरत आशियाना,अधिकारी पतिसुंदर सुयोग्य दो प्यारे बच्चेउससे ईर्ष्यालु थी स्त्रियाँजो तथाकथित दोस्त थीं या रिश्तेदार।मगर, अक्सर वह उदास होतीसोचती, ख़ुशी किस चिड़िया का नाम हैधन-दौलत सब बेमानी लगतेऊब होती शान-शौकत पाखंड सेकिसी पल लगता जीवन पहाड़ सा…

शब्द – संजय मृदुल

शब्द संजय मृदुल शब्दमीठे भी होते हैं शहद सेनमकीन भी आंसुओं सेकड़वे भी धतूरे की तरहशब्द बस शब्द होते  हैस्वाद बदलता रहता हैवक्त के साथ साथ।  शब्दनम होते हैं अश्को सेसूखे भी बंजर जमीन सेगीले भी होते दरिया जैसेशब्द शब्द होते हैंरूप बदलता रहता हैमौसम के साथ साथ। शब्दसाबूत होते हैं चट्टान की तरहरेत की…

तुम अब मत आना – अम्बिका कुमारी कुशवाहा

तुम अब मत आना – अम्बिका कुमारी कुशवाहा जब भी जागूँ मैं निंद्रा सेतुम ख्यालों में मेरे मत आना उदित किरणों की आंनदित ऊष्मा सेतुम काया कण में मेरे मत आना मत आना मेरी किस्सों बातों मेंमेरे ख्वाबों में भी तुम मत आना दर्पण में स्वयं की बिम्बों सेतुम साया बन मेरी मत आना मत…

चिड़िया कैद में

चिड़िया कैद में – दिलीप सिंह यादव उसने अपने आप कोउबारना चाहा खुले आसमान कीसैर करना चाहाउसने उड़ान भी भरालेकिन कुछ ही समय मेंउसके पंख कुतर गएएक ऐसी धारदार छुरी सेजो बनी है पुरुष प्रधानसमाज के लोहे सेउसने हंसना चाहाखुलकर हंसना चाहालेकिन उसकी हंसीदूर तक न पहुंचने दिया गयाउसे बंद कर दिया गयाचारदीवारी के अंदरताकि…