मानवता के गिरते मूल्य
मानवता के गिरते मूल्य -डॉ. मुकेश ‘असीमित’ मानवता का भाव सभी हम भूल गए ,परपीढा का घाव सभी हम भूल गए ।बंधे सब मनुज, स्वार्थ के घेरे में,भूल गए परहित , अपने पराये फेरे में ।घायल पथिक सड़कों पर, पड़ा तड़पता है ,लोग गुजर जाते हैं, जैसे कुछ न घटता है ।हॉर्न की आवाज में,…