जयराम जय की ग़ज़लें
जयराम जय की ग़ज़लें – जयराम जय उजाले के दीपक जगाने चला हूं………………………….. अंधेरे दिलों के मिटाने चला हूंउजाले के दीपक जगाने चला हूं जो सूरज ने बांटे हैं कुछ को उजालेमैं समता का सूरज उगाने चला हूं जिन्हें हाशिए पर ही रख्खा गया हैउन्हें सामने सबके लाने चला हूं बतासे ही मिथ्या बाँटे हैं …