जयराम जय की ग़ज़लें

जयराम जय की ग़ज़लें – जयराम जय उजाले  के  दीपक  जगाने  चला हूं………………………….. अंधेरे   दिलों  के   मिटाने   चला हूंउजाले  के  दीपक  जगाने  चला हूं जो सूरज ने बांटे हैं कुछ को उजालेमैं समता  का सूरज  उगाने  चला हूं जिन्हें  हाशिए पर ही  रख्खा गया हैउन्हें   सामने   सबके  लाने  चला हूं बतासे  ही  मिथ्या  बाँटे  हैं …

अलका मिश्रा की ग़ज़लें

अलका मिश्रा की ग़ज़लें – अलका मिश्रा 1- ख़्वाबों को पलकों पर ढोना पड़ता हैजागी आँखों से भी सोना पड़ता है  उसको पाने की चाहत तो अच्छी हैलेकिन इसमें ख़ुद को खोना पड़ता है मुर्शिद से कुछ पाना हो तो फिर हमकोबिल्कुल बच्चे जैसा होना पड़ता है दुनियादारी के रस्ते पर चल तो देंलेकिन बीच…

डॉ. राकेश जोशी की ग़ज़लें

डॉ. राकेश जोशी की ग़ज़लें – डॉ. राकेश जोशी 1 कोई दस्तूर ज़माने का निराला क्यों होये अँधेरों का शहर है तो उजाला क्यों हो ये सफ़र है तो तुम्हें भी तो कहीं रहना थाइक मेरे पाँव के ही नाम पे छाला क्यों हो ये धुँआ आज जो निकले तो रुके फिर न कभीकारख़ानों के…

अलका मिश्रा की ग़ज़लें – अलका मिश्रा

अलका मिश्रा की ग़ज़लें अलका मिश्रा 1-दर्द, नींदों को मुसलसल नहीं होने देताएक भी ख़्वाब मुकम्मल नहीं होने देता अपने एहसासे मुहब्बत से भी महरूम रखेवो मेरी रूह को, संदल नहीं होने देता उसने बख्शिश में मुझे ग़म तो दिए हैं लेकिनक्या ये कम है , मुझे पागल नहीं होने देता कोई दुश्मन न ज़माने…

राजेन्द्र तिवारी की ग़ज़ल – राजेन्द्र तिवारी

राजेन्द्र तिवारी की ग़ज़लें राजेन्द्र तिवारी 1- कहने को सरदार रहे हो तुम भी तो फिर भी दिल से हार रहे हो तुम भी तो प्यास बुरी शय है समझाते फिरते हो प्यासे बरख़ुर्दार रहे हो तुम भी तो बे-मतलब कोई बाज़ार नहीं जाता क्यों हरदम तैयार रहे हो तुम भी तो कोई कुछ समझाये…

प्रदीप चौहान “दीप” की ग़ज़ल – प्रदीप चौहान “दीप

प्रदीप चौहान “दीप” की ग़ज़ल प्रदीप चौहान “दीप प्रेम के  मैं  गीत  गाता  जा रहा हूंनफ़रतें सारी  हटाता  जा रहा हूं।। हो रहा हैरान है मुझपे  जमानाहार में भी मुस्कराता जा रहा हूँ। दिख रहीं रिश्तों में’मुझको दूरियां जोउन सभी को मैं मिटाता जा रहा हूँ।।  मैं तुम्हारे साथ हूँ सच जान लो येबस तुम्हीं…

पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें – पीयूष अवस्थी

पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें पीयूष अवस्थी दिलों का दिल से अगर वास्ता नहीं होताक़सम ख़ुदा की कोई हादसा नहीं होता यही है प्यार की क़िस्मत,उसे पहुँचना हैउन्हीं हदों में जहाँ रास्ता नहीं होता वो सूने घर में कलेण्डर सा फड़फड़ाता है कि दर्द जिसका कोई हमनवा नहीं होता न जाओ शक़्ल पे,सूरत पे,शखि़्सयत देखोदिखे है जिसमें…

केशव शरण की ग़ज़लें – केशव शरण

केशव शरण की ग़ज़लें केशव शरण 1- किसी शाम भी चार मिलते नहीं हैं अजब हाल है यार मिलते नहीं हैं  कहाँ से ख़बर धड़कनों की मिलेगी दिलों के अगर तार मिलते नहीं हैं किसी भी तरफ़ हम निगाहें फिराएँ हमारे तरफ़दार मिलते नहीं हैं चुभन मात पर भी चुभन जीत पर भी अलग कुछ…

वापस जहां से लौट के आया नहीं गया – जयराम जय

वापस जहां से लौट के आया नहीं गया जयराम जय जिसने  दगा दिया  वो  भुलाया  नहीं गया खुलके  किसी को  दर्द  बताया  नहीं गया  चाहा था  अपनी जान से ज़्यादा सदा जिसे वह शख्स अपने दिल से  हटाया नहीं गया  तुम जा के  बस गए हो भला किस जहांन में  वापस  जहां से  लौट के …

शालिनी श्रीवास्तव की ग़ज़लें –

शालिनी श्रीवास्तव की ग़ज़लें – – शालिनी श्रीवास्तव मुक़द्दर  से  गिला-शिकवा  नहीं  है!!लकीरों  में  लिखा  मिटता  नहीं  है!! बुरा  आया  समय  जीवन  में  लेकिनबहुत  वो  देर  तक  ठहरा  नहीं  है!! सजाएँ अब चलो ख़्वाबों की महफ़िलहुई    मुद्दत   उन्हें    देखा   नहीं   है!! चले  आना  बिना  दस्तक  दिए  तुममिरे   दिल  पर  कोई  पहरा  नहीं   है!!…