प्रेम प्रकाश “प्रेम ” की ग़ज़ल
प्रेम प्रकाश “प्रेम ” की ग़ज़ल – प्रेम प्रकाश “प्रेम” खुल कर कह दे, मन में क्या है ?सच कह दे, उलझन में क्या है ? मौसम है तो फूल खिले हैं,वरना इस उपवन में क्या है ? व्यक्ति नहीं, गुण पूजे जाते,हाड़-मांस के तन में क्या है ? मंहगाई में गुण सुरसा का,छोटे से…