प्रेम प्रकाश “प्रेम ” की ग़ज़ल

प्रेम प्रकाश “प्रेम ” की ग़ज़ल – प्रेम प्रकाश “प्रेम” खुल कर कह दे, मन में क्या है ?सच कह दे, उलझन में क्या है ? मौसम है तो फूल खिले हैं,वरना इस उपवन में क्या है ? व्यक्ति नहीं, गुण पूजे जाते,हाड़-मांस के तन में क्या है ? मंहगाई में गुण सुरसा का,छोटे से…

अशफाक़ ख़ान “जबल ” की ग़ज़ल

अशफाक़ ख़ान “जबल ” की ग़ज़ल – अशफाक़ ख़ान”जबल” गिर जाएगी  नफ़रत की ये दीवार किसी दिनबदलेगी  मुह़ब्बत   में ये  तकरार  किसी दिन लगती   है   मुझे   रेत   की  दीवार  के  जैसीढह जाएगी अब आपकी सरकार किसी दिन साँसों का भी अब बोझ उठाने की नहीं ताबगिर जाए न  ये  जिस्म की दीवार किसी दिन मुफलिस…

निशा श्रीवास्तव की ग़ज़लें

निशा श्रीवास्तव की ग़ज़लें -निशा श्रीवास्तव आप गर रिश्ते बनाया कीजिए।मन से भी सबको निभाया कीजिए।** कौन सी कमजोर नस है आपकी,हर किसी से मत बताया कीजिए।** फूल से नाज़ुक अगर रिश्ते हैंतो,उनको दुनिया से छुपाया कीजिए।** रूठना फितरत हमारी है तो है,आप बस यूँ ही मनाया कीजिए।** लोग तो कहते रहेंगे कुछ न कुछ,दिल…

पुष्पेंद्र ‘पुष्प’ की ग़ज़लें

पुष्पेंद्र ‘पुष्प’ की ग़ज़लें – पुष्पेन्द्र ‘पुष्प’ रक़ीबों  को  पुकारा  जा रहा हैहमें दिल से निकाला जा रहा है हमारी आँख पर पट्टी लगाकरनया मंज़र दिखाया जा रहा है बदन की ख्वाहिशें अब तक वही हैंमगर  चेहरा  बदलता  जा  रहा है जहाँ  तक  है  रसाई तीरगी कीवहाँ तक भी उजाला जा रहा है पुरानी दास्तानों …

भावना मेहरा की ग़ज़लें –

भावना मेहरा की ग़ज़लें – – भावना मेहरा इस जहाँ में आजतक किसका निशाँ बाक़ी रहा।चल दिए सब छोड़कर कोई कहाँ बाकी़ रहा।। चाह ने उसकी घुमाया है हमें यूँ दर- बदर,याद का लेकिन गुज़िश्ता कारवाँ बाक़ी रहा। जल रहा था घर हमारा दोस्तों की भीड़ में,सब गए मुँह मोड़ कर बस ये  धुआँ  बाक़ी…

अनामिका सिंह की ग़ज़लें

अनामिका सिंह की ग़ज़लें अनामिका सिंह (1) बीते पलों के फिर वही मौसम नहीं हुए।तुम भी नहीं हुए तो कभी हम नहीं हुए। कितनी कलाइयाँ कटीं कितने टँगे मिले,बेरोज़गार फिर भी यहाँ कम नहीं हुए। गांधी, सुभाष और भगत को पढ़ा मगर,उनकी तरह तो आज तलक हम नहीं हुए। औरत पे ही तमाम लगीं बंदिशें…

अंसार कम्बरी की गज़लें

अंसार कम्बरी की गज़लें अंसार कम्बरी ग़ज़ल ग़ज़ल में ‘क़म्बरी’ से जब कभी ‘अंसार’ मिलते हैं,ज़माने भर को फिर अश्आर ही अश्आर मिलते हैं। नदी में हर तरफ़ मझधार ही मझधार मिलते हैं,न कोई नांव मिलती है न अब पतवार मिलते हैं। चले हम इश्क़ की राहों पे तो हर बार मिलते हैं,कहीं पत्थर नुकीले…

पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें     

पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें पीयूष अवस्थी (1) उससे मिलने का कोई जब सिलसिला मिल जाएगाउसके दिल तक जाने का कुछ रास्ता मिल जाएगा उम्र भर उसने पढ़ा है आइना बनकर मुझेदेख ले उसकी नज़र मेरा पता मिल जाएगा उसके चेहरे पर पड़ा परदा हटाकर देखियेइक कँवल तो झील में खिलता हुआ मिल जाएगा फूल के…

मेघा राठी की ग़ज़ल

मेघा राठी की ग़ज़ल मेघा राठी मेरी मुहब्बतों का कोई तो सवाब देया तो मसर्रतें ही दे या इज़तराब दे नींदों से जोड़ दे मेरा रिश्ता मेरे खुदाआंखे जो तूने दी हैं तो आंखों में ख़्वाब दे तूने बहुत सवाल किए मुझसे ज़िन्दगी,अब मेरी ख़ामुशी का किसी दिन जबाब दे नफरत का दे जबाब मुहब्बत…

नुसरत अतीक गोरखपुरी की ग़ज़लें

नुसरत अतीक गोरखपुरी की ग़ज़लें नुसरत जहाँक़लमी नाम….नुसरत अतीक़ गोरखपुरी ग़ज़ल हज़ार ग़म सहे बस तेरी इक हंसी के लिएतू ख़ुश रहे यही काफ़ी है ज़िन्दगी के लिए सुबूत अपनी मुहब्बत का और क्या देतेकि ख़ुद को भूल गए हम तेरी ख़ुशी के लिए अजीब दर्द भरा है ये ज़िंदगी का सफ़रकहीं सुकूं नहीं मिलता…