मंगल नसीम की ग़ज़ल

ग़ज़ल बोलती है मंगल नसीम की ग़ज़ल मंगल नसीम परिन्दे हौसला कायम उड़ान में रखना हर इक निगाह तुझी पर है, ध्यान में रखना बलन्दियाँ तिरी हिम्मत को आजमाएँगी परों में जान, नजर आसमान में रखना हर इम्तिहान पे मंजिल करीब आती है हमेशा खुद को किसी इम्तिहान में रखना तू बोलता है तो मिसरी-सी…

पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें

ग़ज़ल बोलती है पीयूष अवस्थी की ग़ज़लें पीयूष अवस्थी (1) जबसे सुना है हमने कि उसका नहीं हूँ मैं सच मानिये कि ख़ुद भी तो अपना नहीं हूँ मैं मैं कर न पाया जिसकी भी हर बात हाँ में हाँ उन सबके वास्ते भी तो अच्छा नहीं हूँ मैं आँसू न पोछ पाऊँ मैं उसकी…

कृष्णकुमार नाज़ की ग़ज़लें

ग़ज़ल बोलती है कृष्णकुमार नाज़ की ग़ज़लें डा. कृष्णकुमार ‘नाज़’ 1. ग़ज़ल हर वक़्त हूँ किसी न किसी इम्तिहान में शायद इसीलिए है ये तल्ख़ी ज़ुबान में अपनी अना की क़ैद से बाहर निकल के देख पैवंद लग चुके हैं तेरी आन-बान में सोह्बत बुरी मिली तो ग़लत काम भी हुए वैसे कोई कमी तो…

देवमणि पाण्डेय की दो ग़ज़लें

ग़ज़ल बोलती है देवमणि पाण्डेय की दो ग़ज़लें देवमणि पांडेय (1) टूट गई है लय जीवन की सुर ग़ायब हैं ताल नहीं  क्या कुछ हमसे छूट गया है इसका हमें ख़याल नहीं अपने ही जब ग़ैर हुए तो वो वृद्धाश्रम चले गए ख़ुश है बेटा, बहू के सर पे अब कोई जंजाल नहीं दिनभर खटा…

मंसूर उस्मानी की दो ग़ज़लें

ग़ज़ल बोलती है मंसूर उस्मानी की दो ग़ज़लें मंसूर उस्मानी चलते हो मेरे साथ तो इतना भी सोच लोराहों में मेरी ग़म का समुंदर भी आएगाख़ुद आप-अपनी ज़द में सितम-गर भी आएगातुम मुंतज़िर रहो कि ये मंज़र भी आएगाइस रेत के नगर को न घबराओ देख करआगे बढ़ो कि एक समुंदर भी आएगामक़्तल को जा…