पीयूष अवस्थी का गीत

पीयूष अवस्थी का गीत पीयूष अवस्थी यह प्यार का पहला आलिंगन —– खुशियाँ करती हैं आवर्तन,साँसें करती हैं अभिनन्दन,यह प्यार का पहला आलिंगन ! दिख रही चाँदनी बलखाई,नापे है तल की गहराई,फिर चाँद ने अमृत बरसाया,नस – नस में बजती शहनाई, जीवन का मोहक परिवर्तन,हो गया तरुण कोई बचपन,यह प्यार का पहला आलिंगन ! खुशियों…

फूल हरसिंगार के

गीत – नवगीत फूल हरसिंगार के जयराम जय मन उपवन में खिलेफूल हर सिंगार के मानता नहीं समीरअस्थिर प्रतिबन्ध कोसाथ दिया विम्बों नेस्वास की सुगन्ध को अधरों में सिमट गयेअक्षर   मनुहार   के पायलिया कहती हैपनघट फिर आना हैगली गॉव देहरी क्यातट-तट बहकाना है कितने  मद  डूबे  हैंपल ये अभिसार के अंग-अंग झलकेनिशिअंचल खामोश हैइसका ये…

अधरों में प्यास बो गया

गीत – नवगीत अधरों में प्यास बो गया जयराम जय सिमट गयेइन्द्र धनुष बाँहों केआकुल आकाश हो गया नाच रही किरन-किरनरंग का रचाव लियेशब्द-शब्द प्राण हँसेप्यार का प्रभाव लिये हौले सेतोड़ बाँध संयम केअधरों में प्यास बो गया बहकती बहार हँसीमौसम के संग -संगनेह बेल छैल गईतरुवर पर अंग-अंग अधरों मेंमहक गया चन्दन वनजाने क्या…

कवि का आत्मकथ्य

गीत – नवगीत कवि का आत्मकथ्य पीयूष अवस्थी मैं कवि नहीं, नहीं हूँ शाइर, गीत नहीं, मैं तो सारी दुनिया का, अन्तर्मन हूँ! चिंगारी में लिपटा अपना चन्दन है, मेरी मौलिकता तो मेरा क्रन्दन है, हमसे ही स्थापित युग आधार शिला, यद्यपि रहा उपेक्षित अपना वन्दन है, घटनाओं को बाँधे, अपनी बाँहों में, खेल गया…

इक्का-घोड़ी सी

गीत – नवगीत इक्का-घोड़ी सी नंदन पंडित भिनसारे से साँझ तलक ले दौड़े इक्का-घोड़ी सी सुस्ताए ना थोड़ी सी सूरज के काँधे पर चढ़के दूब निपाते खेतों की तीर ‘कुआनो’ भागी-भागी डाली तोड़े बेंतों की लिखने वाला फिर भी लिखता किस्मत वही निगोड़ी सी एक जाँघ ढँपती जो ले दे दूजी नंगी हो जाती बुनते-बुनते…

तपन मिली है छाँव से

गीत – नवगीत तपन मिली है छाँव से शिव कुमार सिंह “कुँवर” मंदिर -मदिर मतवारे नयनासबसे अलग तुम्हारे नयना !!सरसिज समझ भ्रमर मंडराये,देख   इन्हें  खंजन  शरमाये,बिन काजर कजरारे नयना !सबसे अलग तुम्हारे नयना !!इनमें बासन्ती तरुणाई, रत्नाकर जैसी गहराई,ये अनुपम रतनारे नयना !सबसे अलग तुम्हारे नयना !!ये मृगशावक से चंचल हैं,इठलाते उड़ते बादल हैं,लगे कि ज्यों…