समाज – व्यवस्था में मूल्यों की चिंता करता एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि संकलन

समाज – व्यवस्था में मूल्यों की चिंता करता एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि संकलन डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा सामजिक परिवर्तन -नियंत्रण द्वारा समाज को सजग -स्वस्थ बनाने में व्यंग्य विधा की महती भूमिका है। उस भूमिका को विशेष आयाम देती है वरिष्ठ साहित्यकार डा .सुरेश अवस्थी की सघः प्रकाशित कृति ‘डा.सुरेश अवस्थी के प्रतिनिधि व्यंग्य (सत्साहित्य प्रकाशन नई…

मन पतंग सा

मन पतंग सा (गीत संग्रह)गीतकार: पीयूष अवस्थीसमीक्षक: उत्तम सिंह (प्रख्यात फिल्म संगीत निर्देशक, मुम्बई) महकते गीतों का गुलदस्ता आज शाइर, गीतकार पीयूष अवस्थी जी की वजह से एक सौभाग्य प्राप्त हुआ है, और वो सौभाग्य ये है कि मैं आशा जी के बारे में कुछ अपने शब्द बयान कर सका ! आशा जी के बारे…

कविता की मनुहार : मनुहारों के शिखर

कविता की मनुहार : मनुहारों के शिखर समीक्षक – डॉ सुरेश अवस्थी बिशेष समर्पण प्रशंसनीय तो है ही, अनुकरणीय भी है। समाचार संपादन की उनकी चेतना का में हमेशा कायल रहा हूं। मुझे अच्छी तरह से याद है कि मैंने अपनी कवि सम्मेलनीय विदेश यात्राओं के दौरान अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड व दुबई आदि देशों से…

समीक्ष्य कृति : इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं ( काव्य-संग्रह )

समीक्ष्य कृति : इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं ( काव्य-संग्रह ) कवि : सुशांत सुप्रिय समीक्षक : राम पांडेय ( उप-संपादक : यात्रा पत्रिका , गोरखपुर ) # ” आधुनिक हिंदी कविता को समृद्ध करती कविताएँ “ इक्कीसवीं सदी के बीते दो दशकों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले युवा कवियों में सुशांत…

अनहद

पुस्तक समीक्षा पुस्तक: ‘अनहद’ उपन्यास लेखक: डॉ. उपमा शर्मा पुस्तक: ‘अनहद’ उपन्यासलेखक: डॉ. उपमा शर्माप्रकाशक: शुभदा प्रकाशन, ग़ाजियाबादभाषा: हिन्दीकीमत: 290/- पृष्ठ: 149 प्रेम की लय पर दो दिलों पर दो दिलों की दास्तान: अनहद समीक्षक: डॉ शबनम सुल्ताना हद चले सो मानवा, बेहद चले जो साध। हद बेहद दोऊ तजे, वा को मता अघाध। जो…

ऊर्जस्वी

पुस्तक समीक्षा पुस्तक: ‘ऊर्जस्वी’ लेखक: नृपेन्द्र अभिषेक ‘‘नृप’’ पुस्तक: ‘ऊर्जस्वी’लेखक: नृपेन्द्र अभिषेक ‘‘नृप’’रचना शैली: प्रेरक आलेखों का संग्रहप्रकाशक: स्वेतवर्णा प्रकाशन, नयी दिल्लीभाषा: हिन्दीकीमत: 199/- पृष्ठ: 115 जीवन को जीने की सीख देती पुस्तक “ऊर्जस्वी”समीक्षक: मोनिका राज व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक रिश्तों से जूझते मन को उभारने और दुनियारूपी सागर में हिचकोले खाते नाव को पार…

उपन्यास – उंगलियाँ

पुस्तक समीक्षा उपन्यास – उंगलियाँ लेखिका: मेघा राठी उपन्यास – उंगलियाँप्रकाशक– फ्लाई ड्रीम्स पब्लिकेशनलेखिका: मेघा राठीपुस्तक मूल्य– 249 रु.पृष्ठ संख्या – 206पुस्तक अमेजन पर उपलब्ध है सिहरन पैदा कर देने वाली कौंध विभिन्न विधाओं के सफल सर्जन से सुसज्जित हस्ताक्षरों में सुश्री मेघा राठी एक विशिष्ट स्थान रखती हैं। आपकी रचनाएं सामयिक घटनाओं को स्पर्श…

‘पिता हूँ मैं’

पुस्तक समीक्षा ‘पिता हूँ मैं’ लेखक: पीयूष अवस्थी पुस्तक: ‘पिता हूँ मैं’लेखक: पीयूष अवस्थीप्रकाशक: शब्दकार प्रकाशन, ग्रेटर नोएडारचना शैली: क़तआत-खंडकाव्यभाषा: हिन्दी-अंग्रेजी-उर्दूकीमत: 700/- पृष्ठ: 144 ‘पिता हूँ मैं’ : एक अद्भुत, अनूठा खण्डकाव्य– डॉ. सुरेश अवस्थी परमपिता शब्द आते ही परमात्मा का स्मरण आता है। परमात्मा जिसे हमने देखा तो नहीं पर जिसकी किसी न किसी…

‘पिता हूँ मैं’

पुस्तक समीक्षा ‘पिता हूँ मैं’ लेखक: पीयूष अवस्थी पुस्तक: ‘पिता हूँ मैं’लेखक: पीयूष अवस्थीप्रकाशक: शब्दकार प्रकाशन, ग्रेटर नोएडारचना शैली: क़तआत-खंडकाव्यभाषा: हिन्दी-अंग्रेजी-उर्दूकीमत: 700/- पृष्ठ: 144 दुनिया के हर पिता का जज़्बासमीक्षक – मंसूर उस्मानी जनाब पीयूष अवस्थी हमारे दौर के एक बहुत जिम्मेदार शायर हैं, उनकी कई किताबें उनको अदबी दुनिया में मनवा चुकी हैं। शायरी…