‘‘अपना’’
लघुकथा ‘‘अपना’’ शोभा रानी गोयल पड़ौस के घर में बच्चे की किलकारी गूंजी तो अनु का दिल बैठ गया। विवाह को दस वर्ष हो गए। अभी तक उसका दामन खाली था। एक से बढ़कर एक डाक्टरों से खूब इलाज लिया। मंदिर दिवाले सब धोक लगाये। प्रार्थना मंत्रोच्चार सब किये। नतीजा वही..सिफर। पड़ौस में खेलते बच्चों…