फटा नोट चलाने की कला

फटा नोट चलाने की कला – अखतर अली जितने भी प्रकार की प्रदर्शनकारी कलाए है उसमें एक कला की ओर आज तक किसी का ध्यान नहीं गया है जबकि इस कला का प्रदर्शन रोज़ाना सैकड़ो कलाकार बीच बाज़ार कर रहे है | यह है फटा नोट चलाने की कला | यह उतनी ही पुरानी कला…

विस्तृत भजिया कथा सार…?

विस्तृत भजिया कथा सार…? – दिनेश गंगराड़े जब और कुछ ना हो खाने के लिये तो मैगी या भजिये  खाना चाहिए।जब बनाने को कुछ और ना हो तो तो भजिये,मैगी बनाना चाहिए। जब भी कुछ खाने का ,खिलाने का मन हो ,कुछ खाने का मन ना हो। करने को कुछ ना हो ,करने के लिये…

प्लास्टर वाली टांग

प्लास्टर वाली टांग –डॉ मुकेश असीमित आप चाहते हैं कि आप हमेशा दुनिया की नजरों में बने रहें, सबकी निगाहें आप पर टिकी रहें। जिस गली से गुजरें, लोग आपको देखकर रुक जाएँ, हाल-चाल पूछें, आपको याद करें। बस, आप आ जाइए हमारे पास, लगवा लीजिए एक प्लास्टर… सच में, हर जगह आपकी पूछ होगी।…

आत्महत्या -एक लंबित प्रकरण – प्रेम प्रकाश चौबे

आत्महत्या -एक लंबित प्रकरण – प्रेम प्रकाश चौबे मित्रो, प्रत्येक मनुष्य के जीवन में अनेक कार्य होते हैं। जिन्हें वह समय रहते सम्पन्न कर लेना चाहता है, किन्तु कुछ काम ऐसे होते हे जो देखने में छोटे होते हुए भी निबटने में नहीं आते। ऐसा ही मेरा एक काम है जिसे में पिछले कई वर्षों…

लीकेज की प्रॉब्लम – पंकज शर्मा तरुण

लीकेज की प्रॉब्लम पंकज शर्मा तरुण आजकल देश में सब से बड़ी प्रॉब्लम( समस्या)लीकेज की है जो दिनों दिन विकराल होती जा रही है।युवा वर्ग को रोजगार के नाम पर व्यस्त रखने का इससे अच्छा कोई उपाय है भी नहीं!सरकार को मध्यप्रदेश की उपजाऊ भूमि से प्राप्त व्यापम घोटाले से प्राप्त नायब आइडिया फलीभूत होता…

किट्टी पार्टी का मज़ाकिया महासंग्राम – नृपेन्द्र अभिषेक नृप

किट्टी पार्टी का मज़ाकिया महासंग्राम – नृपेन्द्र अभिषेक नृप भोपाल के पंजाबी बाग में  दीवा गर्ल्स, जागृति के महिलाओं ने आज फिर से अपने चिर परिचित अंदाज़ में किट्टी पार्टी का आयोजन किया। यह कोई साधारण पार्टी नहीं थी, यह तो मानो महिलाओं का महासंग्राम था— जहां नोकझोंक, हंसी-मज़ाक, डांस और गीत-गाना बजाना का रंगारंग…

महात्मा और गांधी – डॉ मुकेश असीमित

महात्मा और गांधी डॉ. मुकेश असीमित रात सपने में गांधी जी ने दर्शन दिए । सच पूछो तो मैंने पहचाना नहीं ,न तो चश्मा..,न लाठी.., धोती भी फटी हुई,साथ में तीन बन्दर भी नहीं  थे, चरखा भी नहीं  ,बताओ भला कैसे पहचानता । बस कमर झुकी हुई थी ।मेरे पास आकर बैठ गए। मुह से…

सर्व व्याप्त चलायमान जूते…?

सर्व व्याप्त चलायमान जूते…? – दिनेश गंगराड़े जैसे अहंकार गुर्राता है,पैसा बोलता है,वैसे ही जूता भी बोलता है।जूतों की कीमत देखकर गरीबो का खून खौलता है,महंगे दामों के कारण आजकल जूते पैरों में कम सिर पर अधिक रखे जाते हैं?आजकल जनजीवन में जूतों का चलन, सट्टे की बलन,बढ़ते सुख,साधनों की जलन,सदविचारों की गलन का दौर…

मानसून –प्लीज कम सून

मानसून –प्लीज कम सून – डॉ मुकेश ‘असीमित ‘ हे ! बादल भैया, कब तक छुप-छुप के मुस्कुराओगे, जरा बरस के तो दिखाओ रे ! देखो मेरे “मेरे शहर की सड़कों पर जो गड्ढे हैं, वो तुम्हें पुकार रहे हैं। देखो, वो बिल्कुल पुरानी जींस में जैसे फैशन के छेद झांकते हैं , ऐसे तुम्हारी…

भागम भाग का दौर है: डॉ. अजय जोशी

भागम भाग का दौर है डॉ. अजय जोशी आज प्यारेमोहन जी बहुत घबराये हुए डरे से सहमे से हमारे यहां पहुंचे।हमने उनको बिठाया। पानी पिला कर सामान्य किया।जब वो सहज हुए तो हमने पूछा यार, इतने डरे हुए और परेशान क्यों हो भाई? – डरने की बात तो है ही। हुआ यूं कि हमने दुलारेमोहन…