“ये उँगलियाँ”

“ये उँगलियाँ” सावित्री शर्मा “सवि” उँगली करना भी बड़ी बुरी आदत है वैसे आप बचपन में कँचे खेलते थे तो उँगली से ही गड्ढा कर लेते थे तब ये आदत उपयोगी थी ।सब वक्त वक्त की बात है किस समय किसकी उपयोगिता बदल जाये कहना मुश्किल है ।वैसे महिमा उँगली की सदियों से चली आ…

समोसे में जब तक आलू रहेगा

समोसे में जब तक आलू रहेगा अख़्तर अली इस वाक्य को एक बार आप स्वयं बोल कर सुन लीजिये कान में पड़ा रहेगा तो कभी जी बहलाने के काम आयेगा | मेरे शरीर में तो यह खून की तरह दौड़ रहा है , मेरे साथ कदम से कदम मिला कर चल रहा है | जब…

बेचारा दिल क्या करे

व्यंग्य बेचारा दिल क्या करे मेघा राठी ये दिल भी न, बहुत नाशुक्री चीज है। जरा-जरा सी बात पर टूट जाता है तो कभी छोटी सी बात पर खुश हो जाता है…कभी बेवजह धड़कने लगता है तो कभी …कभी किसी पर आ जाता है। यूं तो दिल को किसी को दे पाना बिना सर्जन के…

प्रेम का पंथ कराल महा

व्यंग्य प्रेम का पंथ कराल महा पूरन शर्मा                 बदकिस्मती से खैर शक्ल-सूरत तो हमें आलू-बुखारे सी मिली ही है, साथ ही कभी किसी हसीना ने हमारी तरफ देखने की भूल भी चाहे-अनचाहे रूप से नहीं की है। मौहल्ले की अनारकली को पता था कि हम उस पर…