तिलस्मी साहित्य के जनक बाबू देवकी नन्दन  खत्री 

तिलस्मी साहित्य के जनक बाबू देवकी नन्दन खत्री प्रभात कुमार धवन तिलस्मी साहित्य के जनक बाबू देवकी नन्दन खत्री जी का जन्म आषाढ़ कृष्ण सप्तमी संवत 1918, तदनुसार 18 जून सन 1861 ई. को पूसा, मुजफ्फरपुर (बिहार) में ‘धवन पंजाबी खत्री’ परिवार में हुआ था। इनके पूर्वज पंजाब के निवासी थे। जब वहां अराजकता फैली…

चलते रहने का नाम ज़िंदगी हैः मृत्युंजय कुमार मनोज

चलते रहने का नाम जिंदगी है मृत्युंजय कुमार मनोज चलते रहने का नाम ही जिंदगी है। जिनको जिंदगी से शिकायत है वे पूरी जिंदगी शिकायत ही करते रह जाते हैं। ‘कभी किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता। कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता।’ मानव जीवन के सच को बयां करती ये पंक्तियां हमें पोजिटिव…

रिश्वत किस्तों में

रिश्वत किस्तों में तेजेन्द्र शर्मा जो मुख्य किस्सा समाचार एजेंसियों के हवाले से सामने आया है वो गुजरात के सूरत शहर से सटे एक गाँव का है। वहां एक ग्रामीण से ज़मीन समतल करने के लिये ₹85,000/- की रिश्वत तय की गई। उस ग्रामीण की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। उसने गिड़गिड़ा कर अपनी…

दुनियादारी का ज्ञान

समय की आवाज़ दुनियादारी का ज्ञान रेखा शाह आरबी                                     इस दुनिया में शरीफ और तमीजदार होने के बहुत नुकसान  भी है। कोई चाह कर भी हमेशा के लिए शरीफ और  तमीजदार नहीं रह सकता है।  यह एक…

अनुभव से खुलते है सफ़लता के द्वार

समय की आवाज़ अनुभव से खुलते है सफ़लता के द्वार नृपेन्द्र अभिषेक नृप                                         जीवन में सफल होने के लिए मनुष्य अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करता है। सफलता की प्राप्ति के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती…

प्रेम रसायन है दर्शन नहीं !

समय की आवाज़ प्रेम रसायन है दर्शन नहीं ! दीप प्रकाश गुप्ता                               प्रेम अंधा नहीं होता, अंधा तो व्यक्ति होता है। प्रेम कोई व्यक्ति थोड़ी है जो अंधा या बहरा होगा।दरअसल किसी अंधे को प्रेम हो गया तो उसने कह…