चिड़िया कैद में

चिड़िया कैद में

- दिलीप सिंह यादव

उसने अपने आप को
उबारना चाहा खुले आसमान की
सैर करना चाहा
उसने उड़ान भी भरा
लेकिन कुछ ही समय में
उसके पंख कुतर गए
एक ऐसी धारदार छुरी से
जो बनी है पुरुष प्रधान
समाज के लोहे से
उसने हंसना चाहा
खुलकर हंसना चाहा
लेकिन उसकी हंसी
दूर तक न पहुंचने दिया गया
उसे बंद कर दिया गया
चारदीवारी के अंदर
ताकि कोई सुन न सके
उसे किसी भी काम को करने में
इजाजत लेनी जरूरी है
अगर वो ऐसा न करें
तो सुने जाने
सहे गुस्सा और उत्पीड़न
न तो उसे इस समाज को
देखने का मौका दिया जाता है
न ही एक मनुष्य की तरह रहने का
और उसे बंद कर दिया जाता है
परम्पराओं और रूढ़िवादी पिंजरे में
जिसके बाद उसे उसमें रहने की
आदत हो जाती है..!

– दिलीप सिंह यादव 

पता – गौहानी बडी, चायल

कौशांबी (उत्तर प्रदेश)

पिन-212203

मो•नं•-8187918363

ई- मेल dsy0162002@gmail.com

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