इच्छाएं कीमती हैं

– मेघा राठी

इच्छाएं कीमती हैं

मेघा राठी

जीवन है तो इच्छाओं का होना भी स्वाभाविक है। एक कामना पूरी होते ही दूसरी कामना सिर उठा लेती है। इच्छाओं का होना गलत नहीं है क्योंकि यदि ये नहीं होंगी तो व्यक्ति न तो स्वयं की उन्नति कर सकता है और न ही अपने परिवार–समाज और देश की उन्नति में सहायक बन सकता है। इच्छाओं से पृथक कोई भी व्यक्ति, संस्था या धर्म नहीं रहा है।

संस्थायें भी किसी न किसी उद्देश्य से गठित की जाती हैं और यही उद्देश्य ही उनकी कामना होती है। धर्म के प्रचार –प्रसार के केंद्र में भी संसार और जन जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना का विचार होता है, जीवन को अनुशासित करने की इच्छा होती है जिससे व्यक्ति का चहुमुखी विकास…मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्तर पर हो सके।

प्रत्येक इच्छा मूल्यवान होती है किंतु तभी तक, जब तक कि वह पूर्ण नहीं हो जाती ओर पूर्ण हो जाने के बाद भी यदि उसके प्रति लापरवाही का भाव आ जाए तब हम प्राप्त कामना को खो देते हैं या उससे प्राप्त फल को क्षीण कर देते हैं तब हमें उसकी कीमत समझ आती है।

इच्छाएं महज कल्पना हेतु नहीं हैं अपितु ये प्रेरणा और उत्साह का संवाहक हैं। इनको पूर्ण करने के लिए श्रम के साथ ही साथ सकारात्मक ऊर्जा का होना भी आवश्यक है। सकारात्मकता की शक्ति व्यक्ति को अपनी इच्छा पूर्ति हेतु सही राह चुनने में मदद करती है, उसे उन माध्यमों से परिचित करवाती है जिनके द्वारा वह अपनी मंजिल प्राप्त कर पाता है।

उत्साह का अभाव व्यक्ति की प्रगति और कामनापूर्ति में बाधक होता है। आलस मन खुली आंखों में स्वप्न तो दे सकता है किंतु उनको पूर्ण करने के लिए पुरुषार्थ नहीं दे पाता। उत्साह के साथ ही कुछ कर गुजरने की जिद भी अहम भूमिका रखती है।

इसलिए इच्छाएं को मन में अवश्य स्थान दें किंतु इतना ध्यान रखें कि वे कल्याणकारी हों , किसी का नुकसान करने वाली न हों…तभी उनका पूर्ण होना श्रेयस्कर है अन्यथा उनका अपूर्ण रह जाना ही उचित होगा।

इच्छा और कुत्सित इच्छा के अंतर को समझ कर सही चुनाव करने पर ब्रह्मांड की शक्तियां भी सहायक बन जाती हैं और जब वे पूर्ण होती हैं तो व्यक्ति को पूर्ण संतुष्टि और सुख का असीम आनंद प्राप्त होता है जो उसके प्रभा मंडल को आभामय बना कर अपने संपर्क में आने वाले लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

मेघा राठी

संप्रति: लेखिका उपन्यासकार, अमर उजाला, दैनिक जागरण, जनसत्ता, पंजाब केसरी, वनिता, जागरण सखी, दिल्ली प्रेस की पत्रिकाएं, नूतन कहानियां आदि विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित
प्रकाशित पुस्तकें: गुस्ताखियां, उंगलियां व विभिन्न सांझा संग्रह,
निवास: भोपाल मध्यप्रदेश

 

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