इक्का-घोड़ी सी

गीत - नवगीत

इक्का-घोड़ी सी

नंदन पंडित

भिनसारे से

साँझ तलक ले

दौड़े इक्का-घोड़ी सी

सुस्ताए ना थोड़ी सी

सूरज के काँधे पर चढ़के

दूब निपाते खेतों की

तीर ‘कुआनो’ भागी-भागी

डाली तोड़े बेंतों की

लिखने वाला

फिर भी लिखता

किस्मत वही निगोड़ी सी

एक जाँघ ढँपती

जो ले दे

दूजी नंगी हो जाती

बुनते-बुनते आँचल

चूनर भर

बदरंगी हो जाती

रह-रह पानी छोड़े तंगी 

कूद-कूद

मेंघौड़ी सी

आशाओं के बाल

पक गए

बूढ़े हुए कगार खड़े

आश्वासन के

बजे झुनझुने

बिकते गए सितार बड़े

बदल-बदल के रूप

छलावे

पीटा करें थपोड़ी सी

(स्वरचित/मौलिक/अप्रकाशित)

 नंदन पंडित

इटियाथोक, गोण्डा-उत्तर प्रदेश 

मो॰ न॰ 9415105425

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