कन्यादान

कथा- कहानी

कन्यादान

डॉ. मीरा सिन्हा

सामने मेज पर निमंत्रण कार्ड पड़ा था, जो के डाक से आया था, उसे उठा मैं बड़े गौर से देखने लगी, यह मेरी सखी रिश्म की शादी का कार्ड था !

मुझे अजीब सा आनंद महसूस हो रहा था ! यह शादी रूढ़ियों के बंधन को काटने जा रहा था !

पति के ऑफिस से आते ही मैंने खुशी से चहक कर कहा- रश्मि की शादी का कार्ड है !

कौन रश्मि ? ये चौंक गये ! मैंने हँसते हुए कहा- डॉ चौधरी जी जो दूसरे कालोनी में रहते थे,पर हम लोगों से बहुत आना जाना था !

ये एकदम चौंक गये- अच्छा !! कब शादी है?

मैंने कहा- इसी महीने के अन्त में, चलना है!

उन्होंने हामी भर दी !

मैं चाय उन्हें कुछ देर अकेले बैठ गई !

सारी कहानी एक चित्रपट की तरह घूम गई!

रमाकान्त जी कमिश्नर होकर रिटायर हुए थे, और मेरे घर से आगे दूसरे ब्लाक में आए थे !

एक ही बेटा था सजल चौधरी, जो यहाँ के हॉस्पटल में डॉक्टर था !

पैसे जो न कराये, रमाकान्त जी अपने लाडले बेटे को बहुत प्यार से पाले थे, जब वह मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था, तो बेहद रुईस की तरह रहता था, कुछ दोस्त उसके उसी तरह मिल गये थे ! पैसे का ज्यादा मिलना, सजल को नशा की आदत में डाल दिया, कुछ दोस्तों के साथ वह मॉफिन का इंजेक्शन लेने लगा !

रमाकान्त जी बेटे की शादी एक गरीब परिवार की खूबसूरत लड़की से किए, नाम था रश्मि !

रश्मि निहायत खूबसूरत थी और सारे कार्यों में दक्ष! सास ससुर बेहद खुश !

सजल भी पत्नी से बेहद खुश था, लेकिन वह चुपके से नशा कर आता था !

यह बात रश्मि को जल्द ही पता लग गया, वह बातों-बातों में एक दिन हमसे उसकी चर्चा की, चूाँकि वह हमें एक सहेली के रूप में देखती थी !

मैं क्या कहती, लेकिन यह चिन्ता का विषय था !

अगर सजल नशा नहीं करता, तो वह विद्रोह कर बैठता था और घर का सामान तोड़ने लगता था !

रश्मि परेशान थी, छै महीने तो किसी तरह बीते पर इस नशे की आदत ने सजल की नौकरी ले ली, क्योंकि वह ज्यादातर डयूटी नहीं जाता था !

अंन्त में ये लोग बैंगलोर चले गये, जहाँ उनका अपना घर था !

एक साल बाद पता चला, सजल की मौत हो गई, चूाँकि हमारी घनिष्टता काफी थी, अतः हम दोनों रमाकान्त जी से मिलने गये !

माहौल बहुत गमगीन था, रश्मि इन दिनों सूख गई थी चिन्ता के मारे !

मैं उससे लिपट रोने लगी, दोनों बहुत देर रोते रहे !

दूसरे दिन हमें लौटना था, मैंने समय देख रमाकान्त जी से अकेले में कहा- चाचाजी !! एक बात कहूँ ?

हाँ ! कहो !

बुरा न मानियेगा ! रश्मि आपकी बहू है और बेटी भी, अभी जवान है, आप दोनों हैं, आपके बाद उसका क्या होगा ?

उसे समय देख कहीं अच्छे लड़के से शादी कर दें!

— क्या ?? यह हमारे समाज में नहीं होता !

मैंने कहा- चाचा जी !! बहुत बात नहीं हुुई,लेकिन आज हो रही हैं न ! मेरी बातों पर ध्यान देंगे !

दूसरे दिन मैं चली आई !

उन्होंने आवाज दी, तो मैं चौंक गई- आई !

उन्होंने कहा- क्या सोच रही थीं ?

मैंने कहा- कुछ नहीं… नियत समय पर हम लोग रश्मि की शादी के लिए चल पड़े !

मन खुशी से झूम रहा था, आज समाज में एक नई बात होने जा रही थी, लड़का भी इंजीनियर मिला था, पररवार भी अच्छा ! नाम था संयोग ! सच है अंधेरे के बाद रौशनी आती है !

घर में काफी रौनक थी, रमाकान्त जी काफी खुश थे, तपाक से हम दोनों को ड्राइंग रूम ले गये, स्वागत किया !

मैं अंन्दर चाचीजी और रश्मि से मिलने गई,चाचीजी भी खुश थीं और रश्मि तो हमारे गले लिपट गई !

बहुत देर बाद हम दोनों एक साथ बैठ गप्प करने लगे !

समय पे शादी सम्पन्न हुुई, लड़का बहुत बढ़िया मिला था ! मैंने ईश्वर को धन्यवाद दिया !

रमाकान्त जी ने बेटी की तरह बहू का ‘‘कन्यादान’’ किया !

दूसरे कदन विदाई का बेला आई तो रश्मि अपनी सास से लिपट कर रोने लगी- माँ !! मुझे भुलाइएगा नहीं !

नहीं बेटी ! बेटी को कैसे भूलेंगे !

रमाकान्त जी भी रो रहे थे, यह बेटे की याद थी या एक नये कार्य की खुशी !

तभी रमाकान्त जी ने एक लिफाफा बड़ा सा अपने दामाद को दिया, बेटा- ये रश्मि की जायदाद का हिस्सा है!

संयोग (दामाद) ने ससुर के हाथ पकड़ लिए, बाबा- आपने रश्मि को एक नया जीवन दिया, यह कम है क्या, मुझे कोई हिस्सा नहीं चाहिए !

रमाकान्त जी रोने लगे- अब हम क्या करेंगे, यह उसी का है !

सुंयोग- आज से मैं ही आपका बेटा हूँ! जब मुझे जरूरत होगी, माँग लूँगा अभी आप इसे रखिए !

मैं यह देख अलग रो रही थी, पति भी गमगीन हो गये !

रश्मि की विदाई के बाद दूसरे दिन हम लोग भी चले आये !

रश्मि से अभी भी बातें होती हैं, वह बहुत खुश है, एक बेटा और एक बेटी हुुई!

मैं आँखें बन्द कर एक सुखद दुनिया में खो जाती हूँ।

डॉ. मीरा सिन्हा

नई दिल्ली।

संगीत प्रभाकर, शास्त्रीय संगीत (प्रयाग महाविद्यालय)

सम्प्रति: शिक्षिका, पूर्व व्याख्याता, इंटर कॉलेज 2 सी, बोकारो !

 

कृतियाँ:

s Sorry Mistake ho gayee (एकांकी)

s लॉटरी (एकांकी)

s किरायेदार (एकांकी)

s महिला सम्मेलन (एकांकी)

s सीपी में मोती (कविता-संग्रह) 2023

  (द्वितीय संस्करण)

s स्मृतियाँ जाने अनजाने (कहानी-संग्रह)

 

कृतित्व व उपलब्धियाँ : s  विभिन्न सामाजिक कार्य लगभग 35 वर्ष s भारत विकास परिषद, बोकारो संस्था में 22 वर्ष कार्य s साहित्य एवं संगीत की संस्था ‘‘संस्कार भारती’,  बोकारो में 25 वर्षों तक कार्य s महिला समिति, बोकारो के लिए 21 वर्षों तक कार्य  s अनेक कार्यक्रमों के लिये प्रसिद्ध एकांकी लेखन व निर्देशन का कार्य s वयस्क शिक्षा ‘‘महिला समिति’’में 3 वर्षों तक कार्य प्रभारी s चित्रगुप्त महापरिवार, बोकारो स्टील सिटी में अध्यक्ष पद पर 10 वर्षों तक पदभार, s ‘‘बसेरा, ‘‘स्मृति’,  ‘‘प्रखर-वाणी पत्रिकाओं का सम्पादन ! s बोकारो कवि सम्मेलन में शाल एवं प्रशस्ति पत्र द्वारा सम्मानित  s  तानसेन पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र से सम्मानित, स्थानीय, (बोकारो) !

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