केशव शरण की ग़ज़लें – केशव शरण

Keshav Sharan

केशव शरण की ग़ज़लें

केशव शरण

1-

किसी शाम भी चार मिलते नहीं हैं
अजब हाल है यार मिलते नहीं हैं 

कहाँ से ख़बर धड़कनों की मिलेगी
दिलों के अगर तार मिलते नहीं हैं

किसी भी तरफ़ हम निगाहें फिराएँ
हमारे तरफ़दार मिलते नहीं हैं

चुभन मात पर भी चुभन जीत पर भी
अलग कुछ पुरस्कार मिलते नहीं हैं

झटकते हुए लट बग़ल से गये वो
लिये आँख में प्यार मिलते नहीं हैं

यहाँ गुलबदन सब अजब ही तरह के
समझकर हमें ख़ार मिलते नहीं हैं

अभी काम था आ गये पास मेरे
किसी रोज़ बेकार मिलते नहीं हैं

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2-

कुछ नूर, नज़ारा कम है क्या
नभ एक सितारा कम है क्या

यह फैले मरुथल से मिलता
जल-क्षीण किनारा कम है क्या

जीवन की जंग कड़ी तो है
पर प्यार सहारा कम है क्या

थोड़े में जीते हैं लेकिन
आज़ाद गुज़ारा कम है क्या

दूर रहा करते हो हमसे
तो प्रेम हमारा कम है क्या

लब खोलें क्या हम महफ़िल में
ख़ामोश इशारा कम है क्या

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 – केशव शरण 
9580619244
9415295137

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