कुंडलियां – बसंत की छटा

छन्द विन्यास

कुंडलियां - बसंत की छटा

आशा शुक्ला "कृतिका"

आया अब ऋतुराज ले,इंद्रधनुष के रंग।

 चतुर्दिशा डोले मदन , पीकर  मानों  भंग।

पीकर मानो  भंग, चले चंचल पुरवाई।

 फूल उठे वनफूल, सुरभि धरती पर छाई।

प्रिय बसंत का राग,गीत कोकिल ने गाया।

हर्ष प्रेम आह्लाद, संग बसंत ले आया।।

 

फूलों से उपवन भरा ,झूम उठा ऋतुराज ।

कली कली पर भृंग हैं ,कूके कोयल आज।

कूके  कोयल आज ,मदिर  पुरवाई  डोले।

घूँघट का पट खोल,कली तितली से बोले।

हरी घास पर ओस ,हँसें खग द्रुम -झूलों से।

है बसंत का जोर,भरा उपवन फूलों से।।

 

– आशा शुक्लाकृतिका

शाहजहांपुर, उत्तरप्रदेश

 

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