छिटक निकली
धूप फिर भी
मेह पल भर बरस जाना
ब्याह स्यारों
के हुए हैं
क्वार का है सुखद आना
आँजुरी भर-भरके
खुशबू
ये हवा बिखरा रही है
और गुलमेंहदी
रँगों की छवि
सुभग निखरा रही है
पक्षियों का
रागिनी के
नए सुर में गीत गाना
ब्याह स्यारों
के हुए हैं
क्वार का है सुखदआना
द्वार दीवारों
के रँग वर्षा ने
फीके कर दिये हैं
जलभरावों में
नगर ने
आपदा के पल जीये हैं
यूँ हुए
आश्वस्त मानव का,
तनिक सा मुस्कुराना
ब्याह स्यारों के
हुए हैं
क्वार का है सुखद आना
क्वाँरी बिटिया
की सगाई
क्वार में ही हो गई है
नए जीवन के
सपन पलकों में
लेकर सो गई है
मदन-उत्सव
माह-आश्विन
कुछ दिनों के बाद गवना
ब्याह स्यारों
के हुए हैं
क्वार का है सुखद आना