लीकेज की प्रॉब्लम – पंकज शर्मा तरुण
लीकेज की प्रॉब्लम
पंकज शर्मा तरुण
आजकल देश में सब से बड़ी प्रॉब्लम( समस्या)लीकेज की है जो दिनों दिन विकराल होती जा रही है।युवा वर्ग को रोजगार के नाम पर व्यस्त रखने का इससे अच्छा कोई उपाय है भी नहीं!सरकार को मध्यप्रदेश की उपजाऊ भूमि से प्राप्त व्यापम घोटाले से प्राप्त नायब आइडिया फलीभूत होता जान पड़ रहा है।ताजा ताजा घटनाक्रम जो गर्मागर्म फूली हुई रोटी की तरह सभी विरोधियों के हाथ लगा है उसी को भुनावाने की तैयारी सड़कों पर दिखाई पड़ रही है!बेरोजगार युवाओं को नौकरी का मुद्दा भी पिछले दिनों यू पी बिहार की सड़कों पर दिखाई दिया था जहां पुलिस वाले युवाओं को दौड़ा दौड़ा कर लाठियां भांज कर कह रहे थे कि नौकरी मांगने आए हो!
नीट का पर्चा लीक हुआ तो ताजा ताजा तीसरी बार की अद्भुत सरकार के दुबारा बने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी ने सीधे ही दावा ठोक दिया कि यह गलत है ऐसा कुछ नहीं हुआ है!बिना किसी जांच के ही इनके दिमाग से भी यह लीकेज हो गया!बिहार के उपमुख्य मंत्री सिन्हा साहब तो एक कदम और आगे बढ़ कर अपनी राजनीति का पत्ता फेंक दिए कि यह तो तेजस्वी यादव जी के पी एस की सारी कारस्तानी है इन्होंने यह पेपर खरीदा और लीक कर दिया जैसी सरकार में अब भी तेजस्वी की ही चलती है!सिन्हा साहब तो नाम के उप मुख्यमंत्री हैं?लगता है बिहार के सुशासन का यह एक नायाब उदाहरण है कि वहां पर सरकार पर विरोधी भारी रहते हैं!सरकार को कोई अधिकार ही नहीं हैं कि वे नीट के पर्चे को लीक होने से रोक सके!ऐसा लगता है देश के अंध भक्त युवा की बुद्धि को हाइजेक कर लिया गया है जो बिना रिश्वत कोई काम नहीं होगा यह मान चुका है!गारंटी के जुमले ने प्रधान जी पर भी प्रतिपक्ष या विरोधी या पाकिस्तान समर्थित नेता निराधार आरोप लगाने पर तुले हुए हैं!राष्ट्र प्रेमी अंध भक्त बेरोजगारों को केवल वोट बैंक ही समझने लगे हैं!जब भी भर्तियां निकलती है तो एक पद के लिए सैंकड़ों अभ्यर्थी फॉर्म जमा करते हैं जिनसे फीस के नाम से जो पैसा लिया जाता है वह अरबों रुपया होते हैं जो पेपर के लीक होते ही सरकार के खजाने को भरने के काम आता है!वह अरबों रुपया वापस नहीं लौटाया जाता। उन प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें प्रकाशित होती हैं जिनसे प्रकाशक मालामाल विज्ञापन से अखबार मालामाल,परिवहन के साधन मालामाल और अन्य होटल व्यवसाई भी मालामाल हो जाते हैं।बेचारा बेरोजगार और उसका परिवार लीकेज सुन कर खून के आंसू बहाता चुप बैठ जाता है!इस प्रक्रिया में लाखों युवा ओवर एज हो कर पकोड़े तलने के काबिल हो जाते हैं।
कोटा शहर से आए दिन युवाओं द्वारा आत्महत्या करने की खबरें व्यथित कर देती हैं।कोचिंग के नाम पर यह एक उद्योग में परिवर्तित हो गया है।जिसमें लीकेज का यह महारोग इन युवाओं को जिंदा लील रहा है?प्रतिद्वंद्वीता के इस चोंसर में लगातार हार महाभारत करवा देती है यह बात सरकार के नुमाइंदों के कब समझ में आएगी?देश का यह गरम खून कहीं वाकई उबल कर सड़कों पर बह निकला तो कोन जवाबदार होगा?
लीकेज का यह खेल दिल्ली में भी खेला जा रहा है।पानी के नाम पर हरियाणा सरकार कहती है हम पानी छोड़ रहे हैं मगर रास्ते में पाइप लीकेज कर पानी टैंकर चोर चुरा रहे हैं उसमें भी दिल्ली की आप सरकार के नेता भ्रष्टाचार कर रहे है!बेचारा आम दिल्ली वासी मूक दर्शक बना प्यास से मर रहा है। टी वी चैनल उसे पानी को टैंकर से पाइप डाल कर पानी का लुटेरा साबित करने पर उतारू है।जो वीडियो इन चैनलों पर बार बार पचासों बार दिखाया जाता है वह पूरे संसार में विकसित भारत के स्वप्न को जल्द पूरा करने में मिल का पत्थर साबित होगा! पेपर लीक और पानी लीक में क्या संबंध है विस्तार से समझाएं! इस विषय पर हो सकता आगामी प्रतियोगिता परीक्षाओं में निबंध लिखने के लिए आ सकता है!
– पंकज शर्मा “तरुण “
मोती महल गायत्री नगर
पिपलिया मंडी जिला मंदसौर (म. प्र.)