महेश जैन ज्योति का गीत
मंजिल तेरी आनी है
- महेश जैन 'ज्योति',
अभी और दूरी है बाकी,
अभी दूर मैखाना साकी,
रुक मत आगे बढ़ बंजारे, मंजिल तेरी आनी है ।
अपने हाथों आप नाप ले, कितना तुझमें पानी है ।।
चलते -चलते थका अगर तू, कुछ पल को कर ले आराम,
सुस्ता ले कुछ जल पीले तू, कुछ क्षण को करले विश्राम,
नये हौंसले से फिर चलना,
राहों के शूलों से बचना,
सोच जरा तो क्यों कर तूने,अपनी भृकुटी तानी है ।
अपने हाथों आप नाप ले, कितना तुझमें पानी है ।।(1)
*
इतना रखना ध्यान कभी भी, हो कमजोर नहीं संकल्प,
जो कुछ ठाना पाना ही है, और न कोई कहीं विकल्प,
मुट्ठी बाँध लगा जयकारा,
मत कहना मुख से तू हारा,
अपनी लिखी रागिनी तुझको, अपने स्वर में गानी है ।
अपने हाथों आप नाप ले, कितना तुझमें पानी है ।।(2)
*
एक अकेला जब चलता है, जुड़ते जाते पथ में लोग,
एक कारवाँ बन जाता है,
कट जाते फिर सारे रोग,
हिम्मत टूट न जाये तेरी,
उठ चल कर मत और न देरी,
हाथ थाम लेना साथी के, दुनियाँ आनी-जानी है ।
अपने हाथों आप नाप ले, कितना तुझमें पानी है ।।(3)
– महेश जैन ‘ज्योति’,
6- बैंक कालोनी,
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