मानवता के गिरते मूल्य
मानवता के गिरते मूल्य
-डॉ. मुकेश ‘असीमित’
मानवता का भाव सभी हम भूल गए ,
परपीढा का घाव सभी हम भूल गए ।
बंधे सब मनुज, स्वार्थ के घेरे में,
भूल गए परहित , अपने पराये फेरे में ।
घायल पथिक सड़कों पर, पड़ा तड़पता है ,
लोग गुजर जाते हैं, जैसे कुछ न घटता है ।
हॉर्न की आवाज में, दबा करुण क्रंदन,
सभी व्यस्त स्वहित में , किस का पिघले मन ।
सभी भागे जा रहे, इस अंधी दौड़ में,
एक दूजे से आगे निकलने की होड़ में।
मूल्य मानवता के, हर मोड़ पर गिरते जाते हैं ,
भ्रष्टाचार के दलदल में, पग फिरते जाते हैं ।
राजनीति की कुटिल चालें, गरीबों को मारें ,
लूट ले गयी रोजी रोटी , स्वार्थ की बयारें।
लालफीताशाही के जाल में कैद हुआ इंसान ,
मानवता की जड़ें खोखली , बिका हुआ ईमान ।
शिक्षा भी बाजारू होकर बिकने लगी बाजार में ,
लाश पर भी रोटी सिकने लगी बाजार में ।
हर कोने में हाहाकार मौत का खुला तांडव है ,
मानवता का चीरहरण , असहाय बैठा पांडव है ।
आत्ममुग्धता के नशे में , सारा शहर सो गया है ,
जीवन की इस दौड़ में, जीवन ही खो गया है ।
स्वयं के बनाए घेरे में, मनुज पडा भरमाता है ,
ना खुद से मिल सका, ना समाज से कोई नाता है ।
अब वक्त है जागने का, भीतर झांकने का,
संवेदना के स्तर को , निष्पक्ष आंकने का।
मानवता के मूल्यों को, पुनः जगाने का,
संवेदनशीलता को, जीवन का हिस्सा बनाने का।
तभी होगा समाज का समुचित कल्याण ,
जहां हर दिल में होगा, प्रेम करुना और सम्मान।
भविष्य होगा उज्ज्वल, मिलकर खुशियाँ बांटे ,
मानवता की राह में, फिर न आए कोई कांटे ।
मनुष्यत्व का संकल्प लेकर ,
‘असीमित’ स्वप्न साकार करें !
संवेदनाओं का दीप जलाकर ,
इसे हम स्वीकार करें ।
-डॉ मुकेश ‘असीमित’
निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१
दूरभाष नंबर 9785007828
मेल आई डी –thefocusunlimited€@gmail.com
पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ
लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं