मंगल नसीम की ग़ज़ल

ग़ज़ल बोलती है

मंगल नसीम की ग़ज़ल

मंगल नसीम

परिन्दे हौसला कायम उड़ान में रखना

हर इक निगाह तुझी पर है, ध्यान में रखना

बलन्दियाँ तिरी हिम्मत को आजमाएँगी

परों में जान, नजर आसमान में रखना

हर इम्तिहान पे मंजिल करीब आती है

हमेशा खुद को किसी इम्तिहान में रखना

तू बोलता है तो मिसरी-सी घुलती जाती है

यही मिठास हमेशा ज़्ाुबान में रखना

उड़ान भरके तिरी ओर आ रहा है ये

तू इस परिन्दे को अपनी अमान में रखना!

– मंगल नसीम

प्रख्यात वरिष्ठ शाइर                                       

शाहदरा, दिल्ली- 32

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